भोपाल।काजी कैंप पर मिसाइल वाले बयान को लेकर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। भोपाल में UCC के विरोध में आयोजित सभा के दौरान ओवैसी ने शर्मा के पुराने बयान को लेकर उन्हें खुली चुनौती दी थी। इसके बाद शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा कि ओवैसी बैरिस्टर हैं, इसलिए उन्हें बदतमीजी की भाषा छोड़कर राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दों पर बात करनी चाहिए। दोनों नेताओं के बयानों के बाद विवाद एक बार फिर चर्चा में है।
ओवैसी ने काजी कैंप वाले बयान पर दी थी चुनौती
विवाद की शुरुआत सितंबर के पहले सप्ताह में सामने आए रामेश्वर शर्मा के एक वीडियो से हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, एक कार्यक्रम में उन्होंने करोंद चौराहे से काजी कैंप की ओर मिसाइल गिराने की बात कही थी। बाद में शर्मा ने स्पष्ट किया कि उनका संदर्भ भोपाल के काजी कैंप से नहीं, बल्कि इस्लामाबाद स्थित काजी कैंप से था।
15 सितंबर को भोपाल में UCC विरोधी सभा में ओवैसी ने इसी बयान का जिक्र करते हुए शर्मा को चुनौती दी। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कहा कि यदि शर्मा में हिम्मत है तो मिसाइल चलाकर दिखाएं और वह काजी कैंप में अकेले खड़े रहेंगे।
रामेश्वर शर्मा ने ऑपरेशन सिंदूर का दिया हवाला
ओवैसी के बयान के जवाब में शर्मा ने भारत की सैन्य क्षमता और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई का जिक्र किया। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय सेना ने मिसाइलों के जरिए अपनी क्षमता दिखाई है। शर्मा ने कहा कि आतंकवादी ठिकानों और भारत विरोधी गतिविधियों के खिलाफ देश की मिसाइल क्षमता तैयार है। उन्होंने अपने पुराने बयान पर भी कायम रहने की बात कही।
UCC को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच टकराव
मिसाइल विवाद के साथ समान नागरिक संहिता यानी UCC भी दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। ओवैसी ने भोपाल की सभा में UCC का विरोध करते हुए इसे धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों से जोड़कर सवाल उठाए। वहीं शर्मा UCC के समर्थन में अपनी बात रखते रहे हैं। इस तरह स्थानीय बयानबाजी अब UCC जैसे व्यापक राजनीतिक मुद्दे से भी जुड़ गई है।
बयानबाजी के बीच विवाद और बढ़ा
रामेश्वर शर्मा के पुराने मिसाइल बयान, ओवैसी की चुनौती और उसके बाद शर्मा के पलटवार ने भोपाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। दोनों नेताओं के बयानों में तीखी भाषा का इस्तेमाल हुआ है। फिलहाल यह मामला राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित है और दोनों पक्ष अपने-अपने मुद्दों को लेकर सार्वजनिक मंचों से जवाब दे रहे हैं।