लखनऊ। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 से पहले NDA शासित 21 राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने के बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने UCC को लेकर आपत्ति जताई है। वहीं, भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम ने ओवैसी के बयान पर पलटवार करते हुए UCC को समानता और महिलाओं के अधिकारों से जोड़कर पेश किया।
ओवैसी ने UCC पर जताई आपत्ति
असदुद्दीन ओवैसी ने अमित शाह के बयान का विरोध करते हुए कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता और बहुलतावाद से है। ओवैसी ने UCC को लेकर आरोप लगाया कि इसके जरिए गैर-हिंदू समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने UCC को समानता का कानून मानने पर भी सवाल उठाए।
संगीत सोम का पलटवार
ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संगीत सोम ने कहा कि देश में रहने वाले हर व्यक्ति को देश के कानून का पालन करना चाहिए। उन्होंने UCC को महिलाओं को न्याय और समानता देने वाला कानून बताया। सोम ने दावा किया कि देश में बड़ी संख्या में लोग UCC के पक्ष में हैं। उन्होंने ओवैसी पर कट्टरपंथी राजनीति करने का आरोप भी लगाया। हालांकि, ये संगीत सोम के राजनीतिक आरोप हैं, जिन्हें उनके बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
अखिलेश यादव पर भी साधा निशाना
संगीत सोम ने UCC को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया दी। अखिलेश यादव ने UCC के संक्षिप्त रूप को लेकर राजनीतिक तंज किया था। सोम ने इस पर अखिलेश यादव की आलोचना करते हुए उनके राजनीतिक कामकाज पर सवाल उठाए और कहा कि UCC का विरोध करने वालों के पास इसके अलावा कोई मुद्दा नहीं है।
40 साल से UCC की मांग का दावा
संगीत सोम ने दावा किया कि देश में UCC की मांग करीब 40 वर्षों से होती रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा संविधान के तहत समानता के सिद्धांत को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। UCC के विरोध को लेकर उन्होंने कहा कि उनके अनुसार अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण समानता को लेकर सवाल उठते हैं। वहीं, विपक्षी नेताओं और आलोचकों का तर्क है कि UCC लागू करते समय धार्मिक स्वतंत्रता, व्यक्तिगत कानूनों और भारत की विविध सामाजिक परंपराओं को ध्यान में रखना जरूरी है।
2029 से पहले UCC लागू करने का ऐलान
अमित शाह ने 13 सितंबर को मुंबई में कहा था कि भाजपा-NDA शासित 21 राज्यों में 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले UCC लागू किया जाएगा। फिलहाल उत्तराखंड में UCC लागू है, जबकि गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में संबंधित कानून पारित हो चुके हैं और आगे की प्रक्रिया जारी है। UCC के तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और कुछ राज्यों में गोद लेने तथा लिव-इन संबंधों जैसे नागरिक मामलों के लिए समान नियम बनाए जा रहे हैं। हालांकि, अलग-अलग राज्यों के UCC कानून एक जैसे नहीं हैं और इनके दायरे में भी अंतर है।