भोपाल।मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क मामले की जांच कर रही एसटीएफ को लगातार नए सुराग मिल रहे हैं। कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए एसटीएफ ने दो और संदिग्धों को हिरासत में लिया है। उनसे पूछताछ के जरिए गिरोह के नेटवर्क, सहयोगियों और फर्जी दस्तावेज तैयार करने की पूरी प्रक्रिया से जुड़े कई अहम खुलासे होने की उम्मीद है।
अब तक 70 फर्जी पासपोर्ट मिलने का दावा
जांच में अब तक 70 फर्जी पासपोर्ट बरामद होने की बात सामने आई है। इनमें बड़ी संख्या में पासपोर्ट भोपाल के अलग-अलग पतों पर बनाए जाने की जानकारी जांच एजेंसियों को मिली है। एसटीएफ अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी पहचान और दस्तावेज तैयार करने में किन लोगों ने गिरोह की मदद की।
मुख्य आरोपी डेढ़ साल तक भोपाल में रहा
जांच के दौरान सामने आया कि मुख्य आरोपी रियाल चौधरी कथित तौर पर भोपाल के अन्नानगर इलाके में करीब डेढ़ साल तक फर्जी पहचान के साथ रह चुका है। आरोप है कि गिरोह एक फर्जी पासपोर्ट तैयार कराने के लिए 25 से 30 हजार रुपये तक वसूलता था।
पुलिस और विभागीय कर्मचारियों की भूमिका की जांच
एसटीएफ की जांच में पुलिस, नगर निगम और राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारियों की संभावित मिलीभगत का एंगल भी सामने आया है। जांच एजेंसी अब उन 10 से अधिक पुलिसकर्मियों से पूछताछ की तैयारी कर रही है, जिनके सत्यापन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
विदेशी फंडिंग और चंदे का एंगल भी जांच के घेरे में
एसटीएफ ने एक कैफे संचालक और रियाल चौधरी के केयरटेकर को भी हिरासत में लिया है। जांच में बच्चों के नाम पर 5 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक चंदा जुटाने की जानकारी भी सामने आई है। अब तक चार मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी की बात सामने आई है, जबकि पूरे नेटवर्क के पीछे संभावित विदेशी फंडिंग के एंगल की भी गहन जांच जारी है।