मध्य प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी)-2026 को कैबिनेट की मंजूरी देकर राज्य में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे सभी नागरिकों को समान अधिकार देने और महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उनके अनुसार, इस कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित करना है, जबकि सभी धर्मों की परंपराओं और रीति-रिवाजों का सम्मान भी बरकरार रखा जाएगा।
समान अधिकार दिए जाने का समर्थन
मुख्यमंत्री ने बताया कि यूसीसी लागू करने से पहले राज्य के सभी 51 जिलों में व्यापक जनपरामर्श किया गया। इस दौरान प्राप्त सुझावों के आधार पर मसौदा तैयार किया गया। सरकार के अनुसार, करीब 94 प्रतिशत लोगों ने यूसीसी लागू करने का समर्थन किया, जबकि 92.66 प्रतिशत लोगों ने महिला और पुरुष को संपत्ति में समान अधिकार दिए जाने का समर्थन किया।
विवाह विच्छेद को मान्यता नहीं
नई व्यवस्था के तहत सभी नागरिकों के लिए विवाह पंजीयन अनिवार्य होगा। साथ ही, न्यायालय की विधिक प्रक्रिया के बिना किसी भी विवाह विच्छेद को मान्यता नहीं मिलेगी। उत्तराधिकार के मामलों में महिला और पुरुष दोनों को समान अधिकार प्रदान किए जाएंगे, जिससे लैंगिक समानता को और मजबूती मिलेगी।
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को भी संबंध शुरू होने से एक माह पहले पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इससे कानूनी सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान रखा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि यूसीसी का उद्देश्य किसी धर्म या परंपरा को प्रभावित करना नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों में समानता और न्याय सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि कानून का उल्लंघन करने पर अधिकतम पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान रखा गया है।
राज्य सरकार का मानना है कि यूसीसी-2026 महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करेगा, पारिवारिक विवादों के समाधान में स्पष्टता लाएगा और सामाजिक समानता की दिशा में एक नई शुरुआत साबित होगा।