गुप्त नवरात्रि का आज तीसरा दिन, माँ चंद्रघंटा को इस मंत्र के साथ लगाएं यह खास भोग, दूर होगी आर्थिक तंगी
आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का आज तीसरा दिन है. तंत्र साधना, मंत्र सिद्धि और सोई हुई आध्यात्मिक शक्तियों को जगाने के लिए गुप्त नवरात्रि के नौ दिन बेहद चमत्कारी माने जाते हैं. आज तृतीया तिथि पर माँ दुर्गा के अत्यंत कल्याणकारी स्वरूप 'माँ चंद्रघंटा' की पूजा की जाती है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आज के दिन एक विशेष मंत्र का जाप और देवी को उनका प्रिय भोग लगाने से जीवन की बड़ी से बड़ी आर्थिक तंगी चुटकियों में दूर हो सकती है.
आइए जानते हैं आज पूजा का सही नियम, मंत्र और धन लाभ का वो महाउपाय जो आपकी किस्मत बदल सकता है.

अलौकिक शक्तियों की देवी हैं माँ चंद्रघंटा
माँ चंद्रघंटा का स्वरूप परम शांतिदायक और दिव्य है. इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र (आधा चांद) सुशोभित है, जिससे इनका यह नाम पड़ा. सिंह पर सवार देवी की 10 भुजाएं हैं, जो दुष्टों का नाश करने वाले अस्त्र-शस्त्रों से सजी हैं. मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन इनकी साधना करने से साधक के भीतर का भय समाप्त होता है और मणिपुर चक्र जागृत होता है.
लगाएं 'यह खास भोग'
आप लंबे समय से कर्ज, व्यापार में घाटा या पैसों की तंगी से जूझ रहे हैं, तो आज का दिन आपके लिए वरदान साबित हो सकता है. आज माँ चंद्रघंटा को प्रसन्न करने के लिए ये चीजें अर्पित करें:
केसर युक्त मखाने की खीर: माँ चंद्रघंटा को गाय के दूध से बनी सफेद मिठाइयां या खीर बेहद प्रिय हैं. आज केसर डालकर बनाई गई मखाने की खीर का भोग लगाने से कुंडली में चंद्रमा मजबूत होता है, जिससे रुका हुआ धन वापस मिलता है.
शहद (Honey) का भोग: कार्यों में आ रही रुकावटों और शत्रुओं पर विजय पाने के लिए आज देवी को शहद का भोग लगाना न भूलें.
दिव्य ऊर्जा की जागृति के लिए इस मंत्र का जाप
गुप्त नवरात्रि में मानसिक जाप (मन ही मन बिना आवाज किए) का फल हजार गुना अधिक मिलता है. आज पूजा के समय लाल या पीले रंग के आसन पर बैठकर इस मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें:
कल्याणकारी मंत्र: पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता. प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता॥
त्वरित फल के लिए सरल मंत्र: ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः॥
माँ चंद्रघंटा की सरल पूजा विधि:
स्नान और संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र (लाल या पीले रंग के) धारण करें.
पूजन शुरुआत: सबसे पहले कलश देवता, भगवान गणेश और अखंड ज्योति को प्रणाम करें.
श्रृंगार: माँ चंद्रघंटा की प्रतिमा को गंगाजल से पवित्र कर अक्षत, सिंदूर, कुमकुम और लाल रंग के फूल (विशेषकर कमल या गुलाब) अर्पित करें.
भोग और धूप: देवी को दूध से बनी मिठाई या शहद का भोग लगाएं. धूप-दीप जलाकर ऊपर दिए गए मंत्र का शांत मन से जाप करें.