उत्तराखंड में हिंदी दिवस समारोह

हिंदी को तकनीक से जोड़ने पर जोर, बोले सीएम धामी- यह राष्ट्रीय चेतना की भाषा

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिंदी दिवस पर हिंदी को तकनीकी और डिजिटल युग से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।

By : शिवम् पांडेय
हिंदी को तकनीक से जोड़ने पर जोर, बोले सीएम धामी- यह राष्ट्रीय चेतना की भाषा

उत्तराखंड में हिंदी दिवस समारोह

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिंदी को देश की राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी भाषा बताया है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ हिंदी को तकनीक, विज्ञान और डिजिटल दुनिया से जोड़ना जरूरी है। मुख्यमंत्री धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आयोजित हिंदी दिवस समारोह में साहित्यकारों, लेखकों, भाषाविदों, छात्र-छात्राओं और हिंदी प्रेमियों को शुभकामनाएं दीं।

हिंदी हमारी पहचान का हिस्सा

सीएम धामी ने कहा कि हिंदी दिवस अपनी भाषा, संस्कृति और विरासत पर गर्व करने का अवसर है। हिंदी केवल आपस में बातचीत करने की भाषा नहीं है, बल्कि यह देश की राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक पहचान को भी सामने रखती है। उन्होंने कहा कि हिंदी ने अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और बोलियों के लोगों को जोड़ने का काम किया है। इससे देश में विविधता के बीच एकता की भावना मजबूत हुई है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को देवनागरी लिपि में संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। इसी वजह से हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है।

नई तकनीक से जुड़नी होगी हिंदी

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और डिजिटल तकनीक का है। ऐसे समय में हिंदी को केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि हिंदी को विज्ञान, तकनीक, शोध और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भाषा बनाने पर काम होना चाहिए। युवाओं से उन्होंने नई तकनीक और दूसरी भाषाएं सीखने के साथ अपनी हिंदी और मातृभाषा पर भी गर्व करने की अपील की। सीएम ने कहा कि तकनीक की मदद से हिंदी को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग मंचों तक पहुंचाया जा सकता है।

अपनी भाषा से जुड़ना जरूरी

मुख्यमंत्री ने भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी भाषा किसी भी समाज की तरक्की में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि जो समाज अपनी भाषा और संस्कृति को संभालकर रखता है, वह अपनी पहचान को भी सुरक्षित रखता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय भाषाओं और संस्कृति को दुनिया के मंच पर मिल रही पहचान का भी जिक्र किया। सीएम ने कहा कि जब कोई देश अपनी भाषा और जड़ों पर गर्व करता है, तो दुनिया भी उसकी विरासत को सम्मान देती है।

उत्तराखंड की बोलियां भी हमारी धरोहर

सीएम धामी ने कहा कि भाषा और साहित्य एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। उत्तराखंड ने हिंदी साहित्य को कई बड़े लेखक और कवि दिए हैं। सुमित्रानंदन पंत, गौरा पंत ‘शिवानी’ और चंद्रकुंवर बर्त्वाल जैसे साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं में उत्तराखंड की प्रकृति, लोकजीवन और भावनाओं को जगह दी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान केवल हिंदी से नहीं, बल्कि यहां की अलग-अलग लोकभाषाओं और बोलियों से भी है। गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी, भोटिया, थारू और बंगाणी जैसी भाषाएं प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं।

साहित्यकारों को सम्मान दे रही सरकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिंदी के साथ क्षेत्रीय भाषाओं और साहित्य को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है। ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ के तहत लंबे समय से साहित्य के क्षेत्र में काम कर रहे साहित्यकारों को पांच लाख रुपये की सम्मान राशि दी जा रही है। वहीं, ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ के जरिए हिंदी, गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी, पंजाबी और उर्दू समेत अलग-अलग भाषाओं के साहित्यकारों को सम्मानित किया जा रहा है। ‘साहित्य भूषण’ पुरस्कार के तहत भी उत्कृष्ट साहित्यकारों को 5 लाख 51 हजार रुपये की सम्मान राशि दी जाती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार हिंदी और स्थानीय भाषाओं को डिजिटल माध्यम से जोड़ने के साथ पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने पर भी काम कर रही है। ‘बुके नहीं, बुक देंगे’ जैसी पहल के जरिए लोगों को किताबों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा लेखकों को किताबें प्रकाशित करने के लिए आर्थिक मदद भी दी जा रही है।

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