उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार का दौर

टोटी चोर अखिलेश की सरकार का हिसाब! UP के अपराध आंकड़ों पर सवाल, हत्या-रेप से लेकर दंगों तक

2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार के दौरान अपराध में वृद्धि हुई, जिसमें मुजफ्फरनगर हिंसा और बदायूं कांड प्रमुख थे।

By : शिवम् पांडेय
टोटी चोर अखिलेश  की सरकार का हिसाब! UP के अपराध आंकड़ों पर सवाल, हत्या-रेप से लेकर दंगों तक

उत्तर प्रदेश में 2012 से 2017 तक समाजवादी पार्टी की सरकार रही और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव थे। इस दौर में कानून-व्यवस्था भी लगातार राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनी रही। अपराध के सरकारी आंकड़ों, बड़े आपराधिक मामलों और हिंसक घटनाओं ने सरकार पर बड़े गंभीर सवाल खड़े किये। मुजफ्फरनगर हिंसा,बदायूं  जैसे बड़े कांड अखिलेश सरकार में अपराधियों के बुलंद हौसलों की गवाही देता है। 

NCRB के आंकड़ों में यूपी का अपराध 

केंद्र सरकार के उपलब्ध NCRB आंकड़ों के मुताबिक, 2013 में उत्तर प्रदेश में 19.16 लाख से ज्यादा अपराध दर्ज हुए। 2014 में यह संख्या करीब 23.93 लाख और 2015 में करीब 25.49 लाख रही। यानी इन तीन वर्षों में ही दर्ज संज्ञेय अपराधों की संख्या 68 लाख से ज्यादा रही। 2016 में भी उत्तर प्रदेश देश में IPC अपराधों के कुल मामलों में सबसे बड़े हिस्से वाले राज्यों में था। NCRB के अनुसार उस साल देश में 29.75 लाख IPC अपराध दर्ज हुए और इनमें उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 9.5 प्रतिशत थी।

मुजफ्फरनगर दंगे

2013 का मुजफ्फरनगर हिंसा प्रकरण अखिलेश सरकार के कार्यकाल की सबसे गंभीर घटनाओं में शामिल रहा। अगस्त-सितंबर 2013 में शुरू हुई हिंसा में कम से कम 65 लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए। बाद में सामने आए मामलों की जांच और मुकदमों को लेकर भी लंबे समय तक विवाद रहा। इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच के अनुसार, 41 मामलों में से 40 में आरोपी बरी हुए; इन मामलों में हत्या, दंगा और कथित सामूहिक बलात्कार के मुकदमे शामिल थे। मुजफ्फरनगर की स्थिति पर उस समय पुलिस की भूमिका और प्रशासन की प्रतिक्रिया भी सवालों के घेरे में रही। इंडिया टुडे की तत्कालीन रिपोर्ट के मुताबिक, हिंसा से पहले कई ऐसे मौके आए जब स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिशें प्रभावी नहीं हो सकीं और बाद में सेना बुलानी पड़ी।

बदायूं कांड ने महिला सुरक्षा पर उठाए बड़े सवाल

मई 2014 में बदायूं के कटरा शहादतगंज में दो नाबालिग चचेरी बहनों के शव पेड़ से लटके मिले। शुरुआती आरोपों में दोनों के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या की बात सामने आई। मामले ने देशभर में आक्रोश पैदा किया और अखिलेश सरकार की महिला सुरक्षा को लेकर तीखी आलोचना हुई। बाद में जांच CBI को सौंपी गई। CBI की जांच और उसके निष्कर्षों को लेकर भी विवाद रहा। घटना के बाद अखिलेश यादव ने अधिकारियों और पुलिस से घटना की जानकारी मीडिया से पहले नहीं बल्कि समय पर देने को लेकर सवाल किए थे।

2012 से 2015 तक कई सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं

अखिलेश सरकार के शुरुआती वर्षों में भी कई सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं हुईं। 2016 में विधानसभा में सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक 2012 से 2015 के बीच यूपी में पांच प्रमुख सांप्रदायिक दंगे हुए थे—2012 में बरेली, फैजाबाद और मथुरा, 2013 में मुजफ्फरनगर और 2014 में सहारनपुर। 2014 के सहारनपुर संघर्ष में तीन लोगों की मौत हुई थी। इससे पहले 2012 में कोसीकलां, मथुरा की घटना भी अखिलेश सरकार की विफलता की गवाही देता है। 

2 जून 2016 को मथुरा का जवाहर बाग संघर्ष भी सरकार के लिए बड़ा कानून-व्यवस्था संकट बना। पुलिस और जवाहर बाग में कब्जा किए हुए सशस्त्र समूह के बीच हुई हिंसक झड़प में 24 लोगों की मौत हुई, जिनमें दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी शामिल थे। मौके से बड़ी संख्या में हथियार और कारतूस बरामद किए गए थे। इस घटना के बाद प्रशासन को पहले से मिली खुफिया सूचनाओं और कार्रवाई में हुई देरी को लेकर भी सवाल उठे। इंडिया टुडे की जांच ने दावा किया था कि प्रशासन को संभावित खतरे की जानकारी पहले से थी। यह एक रिपोर्टेड आरोप/जांच का निष्कर्ष था, जिसे सरकार की अंतिम न्यायिक जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

पुलिस पर हमलों के आंकड़े भी बढ़े

अखिलेश सरकार के दौरान पुलिस पर हमलों की घटनाओं के आंकड़े भी विधानसभा में चर्चा का विषय बने। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के अनुसार पुलिस पर हमलों के मामले 2011-12 में 144 से बढ़कर 2012-13 में 202, 2013-14 में 265, 2014-15 में 300 और 2015-16 में 278 रहे। इन आंकड़ों ने पुलिस के सामने मौजूद कानून-व्यवस्था की चुनौती को लेकर बहस को और तेज किया।

बड़े अपराधों के साथ हादसों का दौर भी

अखिलेश सरकार के कार्यकाल में यूपी कई बड़े रेल हादसों का भी गवाह बना। 26 मई 2014 को संत कबीर नगर के खलीलाबाद के पास गोरखपुर-हिसार एक्सप्रेस एक खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई। हादसे में करीब 40 लोगों की मौत हुई और लगभग 150 लोग घायल हुए। 1 अक्टूबर 2014 को गोरखपुर के पास कृष्णक एक्सप्रेस और लखनऊ-बरौनी एक्सप्रेस की टक्कर में कम से कम 12 लोगों की मौत हुई और 46 लोग घायल हुए। लेकिन सबसे बड़ा रेल हादसा नवंबर 2016 में कानपुर देहात के पुखरायां के पास हुआ। इंदौर-पटना एक्सप्रेस के 14 डिब्बे पटरी से उतर गए। बाद की CAG रिपोर्ट में इस दुर्घटना में 150 यात्रियों की मौत दर्ज की गई। यह हादसा अखिलेश सरकार के कार्यकाल में हुई सबसे बड़ी रेल त्रासदियों में शामिल रहा, हालांकि रेलवे केंद्र सरकार के अधीन आता है और इसलिए इसे सीधे राज्य सरकार की प्रशासनिक विफलता के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।

महिला अपराध और FIR 

अखिलेश सरकार के समय अपराध के बढ़ते आंकड़ों पर सरकार की ओर से एक तर्क यह भी दिया गया था कि ज्यादा FIR दर्ज होने से आंकड़े बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। सरकार के तत्कालीन मंत्री एसपी यादव ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि पिछली सरकार के दौरान कई मामलों में मुकदमे दर्ज नहीं किए जाते थे, जबकि समाजवादी पार्टी सरकार में FIR दर्ज कर जांच और कार्रवाई की जा रही थी। इस तर्क का अर्थ यह है कि दर्ज अपराधों में वृद्धि को केवल अपराध बढ़ने के प्रमाण के रूप में नहीं देखा जा सकता; FIR दर्ज करने की प्रवृत्ति और पुलिस रिपोर्टिंग भी आंकड़ों को प्रभावित करती है।

सवाल सिर्फ आंकड़ों का नहीं

2012 से 2017 के बीच यूपी में दर्ज अपराधों के बड़े आंकड़े, मुजफ्फरनगर हिंसा, बदायूं कांड, सहारनपुर संघर्ष, मथुरा जवाहर बाग हिंसा और पुलिस पर हमलों के आंकड़ों ने अखिलेश सरकार के सामने कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार राजनीतिक दबाव बनाए रखा। वहीं सरकार का पक्ष यह रहा कि अपराध के मामलों में FIR दर्ज करना और पुलिस कार्रवाई करना भी आंकड़ों में बढ़ोतरी का एक कारण हो सकता है।  इसलिए अखिलेश सरकार के पांच साल के कानून-व्यवस्था रिकॉर्ड को समझने के लिए केवल किसी एक 'प्रति दिन अपराध' के आंकड़े के बजाय NCRB के साल-दर-साल आंकड़ों, अपराध की अलग-अलग श्रेणियों, FIR दर्ज होने की दर और प्रमुख घटनाओं को साथ में देखना ज्यादा सटीक तस्वीर देता है।

संबंधित सामग्री

उप्र के भदोही जिले को अब ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की घोषणा।

उप्र के भदोही जिले को अब ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की घोषणा।

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले का नाम बदलकर 'संत रविदास नगर भदोही' किया गया। इस दौरान 1,340 करोड़ रुपये की 112 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया।

योगी सरकार में एक और महत्वपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्षता व पारदर्शिता के साथ पूरी

योगी सरकार में एक और महत्वपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया निष्पक्षता व पारदर्शिता के साथ पूरी

उत्तर प्रदेश में होमगार्ड के 41,424 पदों के लिए भर्ती के अंतिम परिणाम जारी किए गए। अभ्यर्थी अपने परिणाम आधिकारिक वेबसाइट पर देख सकते हैं।

धन के अभाव में किसी छात्र की पढ़ाई नहीं रुकेगी: सीएम योगी

धन के अभाव में किसी छात्र की पढ़ाई नहीं रुकेगी: सीएम योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4.60 लाख छात्रों के खातों में 148 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए, ताकि धन के अभाव में कोई भी छात्र शिक्षा से वंचित न रहे।

सीएम योगी ने भदोही दौरे से पहले एक्स पोस्ट किया, लिखा- भदोही के कालीन का बड़ा योगदा

सीएम योगी ने भदोही दौरे से पहले एक्स पोस्ट किया, लिखा- भदोही के कालीन का बड़ा योगदा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के निर्यात में वृद्धि और भदोही के कालीन उद्योग की प्रगति की जानकारी साझा की। इस उद्योग के विकास से प्रदेश के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है।

प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़ा नया मामला, नाबालिग लड़की लापता; परिवार ने पुलिस से लगाई तलाश की गुहार

प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़ा नया मामला, नाबालिग लड़की लापता; परिवार ने पुलिस से लगाई तलाश की गुहार

उत्तर प्रदेश के मथुरा में वृंदावन के प्रेमानंद महाराज आश्रम से जुड़ी नाबालिग लड़की लापता हो गई है। परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

Advertisement

सेवा के 25 वर्ष 14 सितम्बर से  13 ऑक्टोबर