मुंबई में आयोजित पांचजन्य सुशासन संवाद में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भाषा और मराठी को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि भाषा उनके लिए संवाद का माध्यम है, विवाद का नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र में मराठी को प्राथमिकता और सर्वोच्च सम्मान मिलेगा, लेकिन दूसरी भारतीय भाषाएं बोलने वाले लोगों के साथ केवल भाषा के आधार पर किसी तरह का अन्याय नहीं किया जाएगा।
क्षेत्रीय अस्मिता और सभी मातृभाषाओं का सम्मान
फडणवीस ने कहा कि क्षेत्रीय अस्मिता का सम्मान होना चाहिए और हर मातृभाषा का सम्मान किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की अपनी भाषा और मातृभाषा मराठी है, इसलिए राज्य में मराठी को प्राधान्य मिलना स्वाभाविक है। हालांकि, दूसरी भाषाएं बोलने वाले लोगों के अधिकार और सम्मान भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में भाषा के आधार पर अन्याय नहीं होने दिया गया है।
टैक्सी-ऑटो चालकों के मराठी सीखने का मुद्दा
मुख्यमंत्री ने टैक्सी और ऑटो चालकों के लिए कामचलाऊ मराठी सीखने के फैसले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस फैसले को अलग तरीके से पेश किया गया, जबकि इसका उद्देश्य दूसरी भाषाएं बोलने वाले चालकों को रोजमर्रा के काम के लिए सामान्य मराठी सिखाना था। उन्होंने बताया कि इसके लिए तैयार किया गया सिलेबस केवल दो पन्नों का था।
दो पन्नों के सिलेबस में रोजमर्रा की भाषा
फडणवीस ने बताया कि सिलेबस में सामान्य बातचीत से जुड़े वाक्य शामिल थे, जैसे आइए, बैठिए और आप कहां जाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मुंबई के टैक्सी और ऑटो यूनियन से जुड़े हिंदी भाषी चालकों ने उनसे मुलाकात कर खुद मराठी सीखने की इच्छा जताई थी। मुख्यमंत्री के मुताबिक चालकों को इसके लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा और किसी तरह की सख्ती नहीं होगी।
‘मराठी हमारी मां, बाकी भाषाएं हमारी मौसी’
फडणवीस ने कहा कि जिस राज्य में कोई व्यक्ति रहता है, वहां की भाषा की कम से कम कामचलाऊ जानकारी होना उपयोगी है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में मराठी का सर्वोच्च सम्मान रहेगा, लेकिन सभी भारतीय भाषाओं का भी सम्मान किया जाएगा। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा, “मराठी हमारी मां होगी तो बाकी भाषाएं हमारी मौसी होंगी।” मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि दूसरी भाषा बोलने वालों पर भाषा के नाम पर दबाव नहीं बनाया जाएगा।