श्राद्धपक्ष को हिंदू धर्म में पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का समय माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्धपक्ष में भगवान शिव और उनके परम भक्त नंदी का स्मरण करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक लाभ मिल सकता है।
मान्यता है कि भगवान शिव के वाहन नंदी भक्तों की प्रार्थना भोलेनाथ तक पहुंचाने वाले संदेशवाहक हैं। ऐसे में श्राद्धपक्ष के दौरान नंदीकेश्वर शिव का नाम लेकर भगवान शिव की पूजा करने की परंपरा कुछ स्थानों पर बताई जाती है।
नंदीकेश्वर का ध्यान करके करें शुरुआत
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस उपाय के लिए सबसे पहले एक साफ और साबुत धतूरा लिया जाता है। पूजा शुरू करने से पहले मन को शांत करके नंदी देव का ध्यान करने की बात कही गई है। इसके बाद नंदीकेश्वर से भगवान शिव को धतूरा अर्पित करने की अनुमति मांगते हुए अपनी मनोकामना उनके सामने रखने की मान्यता है।
शिवलिंग पर अर्पित करें धतूरा
नंदी देव का स्मरण करने के बाद किसी शिव मंदिर में जाकर श्रद्धापूर्वक धतूरा भगवान शिव को अर्पित किया जाता है। इस दौरान भगवान शिव का ध्यान करने और मन को शांत रखने की बात कही गई है। धार्मिक मान्यताओं में धतूरे को भगवान शिव को अर्पित किए जाने वाले पदार्थों में शामिल माना जाता है।
मनोकामना पूरी होने की है मान्यता
मान्यता के अनुसार, श्राद्धपक्ष में नंदीकेश्वर शिव का नाम लेकर श्रद्धा से की गई पूजा से व्यक्ति की मनोकामना पूरी होने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। खासकर लंबे समय से अटके कार्यों और इच्छाओं के लिए इस तरह की पूजा को फलदायक माना जाता है। हालांकि, मनोकामना पूरी होने या किसी विशेष परिणाम की गारंटी धार्मिक विश्वास का विषय है, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं। पूजा-पाठ व्यक्ति की आस्था और परंपरा के अनुसार किया जा सकता है।