महाराष्ट्र में MPSC की तैयारी कर रहे छात्रों और सरकार के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद फिलहाल बातचीत के बाद थमता नजर आ रहा है। 30 सितंबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने छात्र प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। बैठक के बाद छात्रों ने 2 अक्टूबर को पुणे में प्रस्तावित आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने का फैसला किया।
ऑफलाइन ही होंगी MPSC परीक्षाएं
बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षाएं ऑफलाइन ही आयोजित की जाएंगी। परीक्षा प्रणाली में किसी भी बदलाव से पहले छात्र संगठनों और संबंधित पक्षों से चर्चा की जाएगी। यह छात्रों की प्रमुख मांगों में शामिल था।
MPSC सचिव के तबादले पर सहमति
सरकार ने MPSC सचिव के तत्काल तबादले पर भी सहमति जताई है। छात्रों की ओर से आयोग के कामकाज और सचिव की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए थे। सरकार के इस फैसले को छात्रों की प्रमुख मांगों में से एक पर कार्रवाई के तौर पर देखा जा रहा है।
अध्यक्ष और सदस्यों के खिलाफ न्यायिक जांच
MPSC के पूर्व और वर्तमान अध्यक्षों तथा सदस्यों के कामकाज को लेकर छात्रों की शिकायतों पर तीन महीने के भीतर न्यायिक जांच कराने की बात कही गई है। सरकार के मुताबिक जांच संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत कराई जाएगी। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई का फैसला होगा। छात्रों ने आयोग के पूर्व और वर्तमान अध्यक्षों तथा सदस्यों को हटाने की मांग की थी। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि MPSC अध्यक्ष का पद संवैधानिक है और उन्हें हटाने की प्रक्रिया संविधान में तय प्रावधानों के अनुसार ही हो सकती है।
बड़ी संख्या में भर्तियों का आश्वासन
सरकार ने MPSC के जरिए होने वाली भर्तियों में रिक्त पदों की संख्या बढ़ाने की बात भी कही है। खास तौर पर ग्रुप-C पदों पर बड़ी संख्या में भर्ती की योजना बताई गई है। सरकार की ओर से तीन साल की रिक्तियों और भर्ती का विस्तृत प्लान तैयार करने की भी बात सामने आई है। इन फैसलों के बाद MPSC छात्रों ने 2 अक्टूबर को पुणे में प्रस्तावित आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया है। अब छात्रों की नजर सरकार की ओर से किए गए इन फैसलों के अमल पर रहेगी।