मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन अब तक औसतन 37.7 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है। यह प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच के मुकाबले 95.8 प्रतिशत है। सामान्य बारिश की कैटेगरी में आने के लिए अब महज 0.2 प्रतिशत बारिश की जरूरत है। अगले तीन दिनों में हल्की बारिश भी हुई तो प्रदेश सामान्य बारिश के आंकड़े तक पहुंच सकता है।
एक सप्ताह में शुरू हो सकती है मानसून की विदाई
मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई करीब एक सप्ताह के अंदर शुरू होने का अनुमान है। अगले चार दिनों में प्रदेश के किसी भी जिले में अति भारी या भारी बारिश की संभावना नहीं है। मंगलवार से उज्जैन, इंदौर और ग्वालियर-चंबल संभाग में तेज धूप देखने को मिल सकती है।
48 घंटे तक भारी बारिश के बाद कमजोर हुआ सिस्टम
गहरे अवदाब के प्रभाव से प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में करीब 48 घंटे तक अति भारी और भारी बारिश हुई। इससे कई नदियां उफान पर आ गईं और कई बांधों के गेट खोलने पड़े। रविवार से मौसम सिस्टम कमजोर होने लगा और भारी बारिश का दौर थम गया।
पूर्वी हिस्से में औसत से ज्यादा बारिश
प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब 4 प्रतिशत अधिक है। हालांकि बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी समेत कुछ जिलों में 2 से 20 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज हुई है।
पश्चिमी जिलों में बारिश का आंकड़ा कम
पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में 9 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।
26 जिलों में सामान्य से ज्यादा पानी
IMD के आंकड़ों के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, डिंडौरी, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज हुई है।
जून की कमी जुलाई-अगस्त की बारिश से पूरी नहीं हुई
इस मानसून जून में प्रदेश में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश हुई, लेकिन मानसून के बीच दो बार ब्रेक आने से जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। अंतिम दौर में मजबूत सिस्टम सक्रिय हुआ, इसके बावजूद अब तक प्रदेश में सामान्य से करीब 4 प्रतिशत कम बारिश दर्ज है।
भोपाल में चार साल से कोटे से ज्यादा बारिश
भोपाल में सितंबर की औसत बारिश करीब 7 इंच है। पिछले चार साल से सितंबर में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की जा रही है। राजधानी में सितंबर महीने में सबसे ज्यादा बारिश का रिकॉर्ड 1961 का है, जब पूरे महीने 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश 2 सितंबर 1947 को दर्ज हुई थी।