स्पेसएक्स के विशाल रॉकेट Starship ने 28 सितंबर 2026 को अपनी 14वीं टेस्ट फ्लाइट के लिए उड़ान भरी। यह मिशन कंपनी के लिए खास है, क्योंकि पहली बार Starship को पृथ्वी की ऑर्बिट में भेजने की कोशिश की जा रही है। इससे पहले की 13 उड़ानें सब-ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी पर संचालित की गई थीं। इस मिशन में Starship के जरिए पहली बार 26 अगली पीढ़ी के Starlink V3 सैटेलाइट्स तैनात किए जाने हैं। मिशन की योजना के मुताबिक Starship करीब 275 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ते हुए पृथ्वी के लगभग छह चक्कर लगाएगा। इसके बाद नियंत्रित री-एंट्री और समुद्र में स्प्लैशडाउन का प्रयास किया जाएगा।

पहली बार ऑर्बिटल मिशन

Starship को दो मुख्य हिस्सों से मिलकर बनाया गया है—ऊपरी हिस्सा Starship spacecraft और निचला हिस्सा Super Heavy booster। दोनों को मिलाकर पूरे सिस्टम को Starship कहा जाता है। इससे पहले Starship की टेस्ट उड़ानों का उद्देश्य मुख्य रूप से अलग-अलग तकनीकों को परखना और उड़ान से जुड़ा डेटा जुटाना था। Flight 14 में पहली बार मिशन को पृथ्वी की कक्षा तक ले जाने की कोशिश की जा रही है।
क्या है ऑर्बिटल और सब-ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी?

सब-ऑर्बिटल उड़ान में रॉकेट अंतरिक्ष की ऊंचाई तक पहुंचने के बाद पृथ्वी की पूरी कक्षा में स्थापित नहीं होता और वापस वातावरण की ओर लौट आता है। वहीं ऑर्बिटल उड़ान में वाहन को इतनी गति और दिशा दी जाती है कि वह पृथ्वी के चारों ओर कक्षा में बना रह सके। यही वजह है कि Flight 14 को Starship के विकास में एक महत्वपूर्ण परीक्षण माना जा रहा है।
26 Starlink V3 सैटेलाइट्स होंगे तैनात
मिशन का एक प्रमुख उद्देश्य नई पीढ़ी के Starlink V3 सैटेलाइट्स की तैनाती है। SpaceX के मुताबिक V3 सैटेलाइट्स को ज्यादा क्षमता के साथ डिजाइन किया गया है। कंपनी के दस्तावेज के अनुसार एक V3 सैटेलाइट लगभग 1 Tbps डाउनलिंक क्षमता देने के लिए डिजाइन किया गया है। Flight 14 में 26 सैटेलाइट्स भेजे जाने की योजना है। इनके जरिए Starlink नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने और भविष्य में ज्यादा डेटा ट्रैफिक संभालने की दिशा में काम किया जाएगा।
हीटशील्ड की भी होगी जांच
इस उड़ान में Starship की हीटशील्ड और री-एंट्री तकनीक को भी परखा जाएगा। मिशन के दौरान अंतरिक्ष यान के वातावरण में वापस प्रवेश करने के समय उसके हीटशील्ड प्रदर्शन से जुड़ा डेटा जुटाया जाना है। यह तकनीक भविष्य में Starship को बार-बार उड़ाने और सुरक्षित तरीके से वापस लाने के लिए महत्वपूर्ण है।
पिछली उड़ानों से मिली सीख
Starship की पिछली टेस्ट फ्लाइट्स में कई तकनीकी उपलब्धियां हासिल हुई हैं। 12वीं उड़ान में पहली बार V3 Starship और Super Heavy तथा Raptor 3 इंजन का इस्तेमाल किया गया था। उस मिशन में Starlink सैटेलाइट सिमुलेटर और संशोधित सैटेलाइट्स को तैनात कर अंतरिक्ष में Starship की तस्वीरें लेने का परीक्षण भी किया गया था। 13वीं उड़ान में Starship ने 20 Starlink V3 सैटेलाइट्स को सफलतापूर्वक तैनात किया था और अंतरिक्ष में Raptor इंजन को दोबारा चालू करने का परीक्षण भी किया गया। इसके बाद Starship ने वातावरण में री-एंट्री कर हीटशील्ड से जुड़ा डेटा जुटाया।
अब मिशन की सबसे बड़ी चुनौती
Flight 14 का सबसे बड़ा लक्ष्य Starship को पहली बार ऑर्बिटल मिशन पर भेजना है। इसके साथ सैटेलाइट तैनाती, अंतरिक्ष में इंजन री-लाइट, हीटशील्ड प्रदर्शन और नियंत्रित री-एंट्री जैसी तकनीकों को भी परखा जा रहा है। अगर मिशन के सभी प्रमुख चरण सफल रहते हैं, तो यह SpaceX के Starship कार्यक्रम के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी डेटा उपलब्ध करा सकता है। हालांकि, यह अभी भी एक टेस्ट फ्लाइट है और मिशन के दौरान किसी भी चरण में तकनीकी बदलाव या असफलता संभव है।