फर्जी पासपोर्ट रैकेट की जांच

विदेश मंत्रालय ने 2023 में दी थी चेतावनी, फिर भी फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क पर नहीं लगी रोक

मध्य प्रदेश में फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क की जांच में गंभीर खुलासे हुए हैं, जिसमें पुलिस और अन्य सरकारी विभागों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।

By : दिव्या मिस्त्री
विदेश मंत्रालय ने 2023 में दी थी चेतावनी, फिर भी फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क पर नहीं लगी रोक

मध्य प्रदेश में फर्जी पासपोर्ट रैकेट की जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि विदेश मंत्रालय ने वर्ष 2023 में ही मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय यानी PHQ को फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने की आशंका को लेकर रिपोर्ट भेजी थी। इस रिपोर्ट में प्रदेश में चल रही संदिग्ध गतिविधियों के प्रति पुलिस मुख्यालय को आगाह किया गया था।

संबंधित विभागों को क्या निर्देश दिए गए

रिपोर्ट सामने आने के बावजूद इस मामले में समय रहते ठोस कार्रवाई हुई या नहीं, अब यह STF की जांच का अहम हिस्सा बन गया है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि विदेश मंत्रालय की चेतावनी के बाद पुलिस मुख्यालय ने किन स्तरों पर कार्रवाई की और संबंधित विभागों को क्या निर्देश दिए गए।

फर्जी पासपोर्ट का नेटवर्क भोपाल से लेकर ग्वालियर के डबरा तक फैला हुआ था। जांच में सामने आया है कि अलग-अलग जिलों में एक जैसे पते और दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट तैयार किए गए। यदि इन दस्तावेजों का समय रहते सत्यापन किया जाता, तो संभव है कि नेटवर्क का खुलासा पहले ही हो जाता।

इसकी भी समीक्षा की जा रही

इस मामले ने पासपोर्ट सत्यापन की प्रक्रिया और विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस, स्थानीय प्रशासन और पासपोर्ट से जुड़े विभागों के बीच दस्तावेजों की जांच किस तरह की जाती है, इसकी भी समीक्षा की जा रही है।

STF अब पुराने रिकॉर्ड खंगाल रही है। वर्ष 2021-22 और उसके बाद के वर्षों में जारी किए गए पासपोर्ट की जांच की जा रही है। संदिग्ध आवेदनों, एक जैसे पतों और बार-बार इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों के आधार पर नेटवर्क की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

जांच पूरी होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि चेतावनी मिलने के बावजूद कार्रवाई में कहां कमी रही और इस पूरे मामले में किन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है।

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