मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को मुख्य सेवक सदन, मुख्यमंत्री आवास में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस के आरोपों, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती देश की संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसे से जुड़ी है और चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है।
अपनी हार का ठीकरा कभी EVM तो कभी संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ना कांग्रेस की आदत बन गई है। जनता का विश्वास खो चुकी कांग्रेस को अब हार के लिए कोई नया बहाना तलाशना होगा। pic.twitter.com/iDsiIHdd98
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) September 27, 2026
SIR पर क्या बोले CM धामी
मुख्यमंत्री धामी ने 26 सितंबर को चुनाव आयोग की पूर्ण बैठक के बाद जारी आधिकारिक नोट का हवाला देते हुए कहा कि SIR से जुड़े फैसले आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं। चुनाव आयोग ने भी 26 सितंबर को कहा था कि SIR से संबंधित अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए और मतदाताओं की सुविधा के लिए प्रक्रिया में कुछ बदलाव किए गए हैं।
धामी ने कहा कि किसी आंतरिक टिप्पणी को सीधे आयोग के अंतिम निर्णय में मतभेद के तौर पर पेश करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछे जाने चाहिए, लेकिन किसी आंतरिक आपत्ति और अंतिम संस्थागत निर्णय के बीच अंतर समझना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने बिहार में SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले का भी उल्लेख किया। सुप्रीम कोर्ट के आधिकारिक निर्णय सारांश के मुताबिक, अदालत ने बिहार में चुनाव आयोग द्वारा कराए गए SIR की वैधानिकता को बरकरार रखा और इसे संविधान के अनुच्छेद 324 तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) से संबंधित माना। अदालत ने प्रक्रिया को संबंधित कानून और 1960 के नियमों के अनुरूप पाया।
मतदाताओं के लिए चुनाव आयोग के नए कदम
SIR को लेकर चुनाव आयोग ने मतदाताओं की सुविधा के लिए कई कदमों की घोषणा की है। अनमैप्ड या लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी वाले मतदाताओं के दस्तावेज लेने के लिए BLO को घर भेजने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, श्रमिकों, गरीब और बेघर नागरिकों के लिए हेल्प डेस्क और विशेष कैंप लगाने की बात कही गई है। पहली बार मतदाता बनने वाले और छूटे हुए मतदाताओं के नाम जोड़ने के लिए भी विशेष अभियान चलाने की व्यवस्था की गई है। चुनाव आयोग ने ECINET की तकनीकी समीक्षा के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञों को शामिल करने की बात भी कही है।
ECINET और आयोग की कार्यप्रणाली पर भी बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि ECINET को लेकर उठाए गए सवालों की स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा की व्यवस्था की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि आगे से आयोग की बैठकों का एजेंडा पहले सर्कुलेट करने और बैठकों के मिनट्स जारी करने का निर्णय लिया गया है। उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर भी 2026 के SIR से जुड़े अलग-अलग प्रेस नोट उपलब्ध हैं, जिनमें राज्य में SIR की प्रक्रिया और समय-सारिणी से संबंधित जानकारी दी गई है।
कांग्रेस पर CM धामी का हमला
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी चुनावी और राजनीतिक असफलताओं के लिए कभी EVM तो कभी संवैधानिक संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराती है। धामी ने कांग्रेस के संगठन और उसके नेताओं को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक आरोपों के लिए इस्तेमाल करने के बजाय तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए।
युवाओं और भर्ती परीक्षाओं का मुद्दा
राहुल गांधी के देहरादून दौरे के दौरान भर्ती परीक्षाओं में नकल से जुड़े बयान का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नकल विरोधी कानून लागू किया गया है और नकल के मामलों में 100 से अधिक आरोपियों को जेल भेजा गया है। धामी ने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई हैं। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाना सरकार की प्राथमिकता है।
जातीय राजनीति पर भी बोले मुख्यमंत्री
हल्द्वानी प्रकरण और जमीन से जुड़े कांग्रेस के आरोपों पर भी मुख्यमंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी घटना को जातीय दृष्टिकोण से देखने से पहले उसके पूरे तथ्य सामने आने चाहिए। धामी ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान सामाजिक समरसता और आपसी भाईचारे से रही है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष के पास सरकारी संस्था या सरकार द्वारा नियमों के खिलाफ जमीन दिए जाने या बेचने से जुड़ा कोई प्रमाण है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
राजनीतिक भाषा और मर्यादा पर जोर
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत माता, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और पूर्व CDS जनरल बिपिन रावत से जुड़े राजनीतिक बयानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन सार्वजनिक जीवन में भाषा और मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
प्रेस वार्ता के अंत में मुख्यमंत्री ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष को चुनावी हार के लिए EVM और संवैधानिक संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराने के बजाय अपनी राजनीतिक रणनीति और प्रदर्शन पर विचार करना चाहिए।