बिहार में पुल का इंतजार

बिहार के इस गांव को आज भी पुल का इंतजार, नेताओं से टूटा भरोसा तो ग्रामीणों ने खुद बनाया बांस का पुल

बिहार के जमुई जिले के गांव वासियों ने वर्षों से पुल की मांग की, लेकिन सरकारी आश्वासनों के बिना कोई समाधान नहीं मिला। अब उन्होंने खुद बांस का पुल बनाया।

बिहार के इस गांव को आज भी पुल का इंतजार, नेताओं से टूटा भरोसा तो ग्रामीणों ने खुद बनाया बांस का पुल

बिहार के जमुई जिले के खैरा प्रखंड की हरनी पंचायत के जतहर और कैरवातरी गांव के लोगों की परेशानी आज भी खत्म नहीं हुई है। आजादी के करीब 80 साल बाद भी ग्रामीण एक अदद पुल का इंतजार कर रहे हैं। करीब 150 मीटर चौड़ी नदी बरसात के मौसम में दोनों गांवों को मुख्यधारा से पूरी तरह अलग कर देती है।

नेताओं के आश्वासन से ग्रामीण निराश

ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से विधायक, सांसद और मंत्रियों से पुल निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। कई बार गांव पहुंचकर जनप्रतिनिधियों ने जल्द पुल बनवाने का भरोसा भी दिया, लेकिन जमीन पर काम शुरू नहीं हुआ। अब ग्रामीणों का नेताओं के आश्वासनों से भरोसा लगभग टूट चुका है।

बच्चों की पढ़ाई पर भी असर

जतहर और कैरवातरी गांव में करीब 250 से 300 लोग रहते हैं। स्कूल जाने वाले बच्चों को रोजाना नदी पार कर अरुणमबांक यानी सोखो जाना पड़ता है। बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर बच्चों के लिए यह रास्ता बेहद खतरनाक हो जाता है। ग्रामीणों को हर दिन जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है।

मरीजों को खटोली पर ले जाने की मजबूरी

पुल नहीं होने का सबसे बड़ा असर मरीजों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ता है। गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती। ऐसे में गंभीर मरीजों को खटोली पर लादकर नदी पार करानी पड़ती है और फिर उन्हें खैरा रेफरल अस्पताल ले जाया जाता है। पंचायत सरकार भवन, स्वास्थ्य केंद्र और अन्य सरकारी सुविधाओं तक पहुंचने में भी ग्रामीणों को इसी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों ने खुद जुटाया चंदा

बारिश शुरू होते ही समस्या और गंभीर हो गई। सरकारी पुल का इंतजार करते-करते ग्रामीणों ने अब खुद रास्ता बनाने का फैसला किया। लोगों ने आपस में चंदा जुटाया और बांस-बल्ले के सहारे अस्थायी पुल यानी बंबू ब्रिज बनाने का काम शुरू कर दिया।

मजबूरी में खुद बना रहे रास्ता

ग्रामीणों का कहना है कि जब वर्षों तक सरकार और जनप्रतिनिधियों की ओर से पुल नहीं बनाया गया, तो अब मजबूरी में उन्हें खुद रास्ता तैयार करना पड़ रहा है। यह बांस का पुल उनके लिए सिर्फ एक अस्थायी रास्ता नहीं, बल्कि सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच का फर्क भी दिखा रहा है।

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मुख्य मंत्री सुगम परिवहन सेवा MP Add  on 09 Sep 2026 To 26 Sep 2026

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