मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गणपति बप्पा घर-घर विराजमान हो चुके हैं, लेकिन नगर निगम की विसर्जन तैयारियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जिन घाटों और विसर्जन कुंडों की तैयारी पहले से पूरी होनी थी, उनका निरीक्षण अब किया जा रहा है। महापौर मालती राय ने भी घाटों का जायजा लिया।
25 करोड़ से ज्यादा की योजना
भोपाल में स्थायी गणेश विसर्जन व्यवस्था के लिए करीब 25 करोड़ 8 लाख रुपये से अधिक का प्रस्ताव पास हुआ था। जुलाई 2025 में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, नीलबड़, संजीव नगर, मालीखेड़ी और प्रेमपुरा में विसर्जन कुंड और विकास कार्य कराने की योजना बनाई गई थी। करीब 14 महीने बाद भी योजना पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर पाई है।
पांच जगहों पर करोड़ों रुपये का प्रावधान
प्रस्ताव के तहत बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के लिए 4.45 करोड़, नीलबड़ के लिए 6.01 करोड़, संजीव नगर के लिए 4.77 करोड़, मालीखेड़ी के लिए 2.49 करोड़ और प्रेमपुरा के लिए 7.34 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। इसके बावजूद इस बार भी कई जगह पुराने घाटों पर ही विसर्जन की व्यवस्था करनी पड़ रही है।
पर्यावरणविदों ने विसर्जन व्यवस्था पर जताई चिंता
पर्यावरणविद् सुभाष सी. पाण्डेय ने जलस्रोतों में मूर्ति विसर्जन से पानी और जलीय जीवों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि भोपाल जैसे बड़े शहर में पर्याप्त संख्या में अलग विसर्जन कुंड होने चाहिए। उन्होंने एनजीटी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइडलाइन के मुताबिक जलस्रोतों में सीधे मूर्ति विसर्जन से बचने और अलग कुंड बनाने की जरूरत बताई।
पीओपी और रासायनिक रंगों से बचने की अपील
सुभाष सी. पाण्डेय ने पीओपी की मूर्तियों और रासायनिक रंगों के इस्तेमाल से बचने की बात कही। उनका कहना है कि विसर्जन से पहले मूर्तियों से आभूषण और वस्त्र अलग कर लेने चाहिए। विसर्जन कुंड में सिंथेटिक लाइनर की व्यवस्था होने से मूर्ति के अवशेषों को निकालकर उचित तरीके से निपटाया जा सकता है।
मेयर बोलीं- 25 से 30 अस्थायी घाट बनेंगे
महापौर मालती राय के मुताबिक छोटी गणेश प्रतिमाओं के लिए शहर में करीब 25 से 30 अस्थायी घाट बनाए जाएंगे। बड़ी प्रतिमाओं का विसर्जन सात स्थायी घाटों पर कराने की तैयारी है। उन्होंने बताया कि मालीखेड़ी का स्थायी घाट तैयार हो चुका है, जबकि नीलबड़ का प्रोजेक्ट बड़ा होने के कारण फिलहाल उसका काम रुका हुआ है।
कांग्रेस ने उठाए बजट और काम पर सवाल
कांग्रेस प्रवक्ता स्वदेश शर्मा ने विसर्जन घाटों की स्थिति को लेकर नगर निगम और सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत होने के बावजूद काम अधूरा है। उन्होंने बजट के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाते हुए इसे भ्रष्टाचार से जोड़ने का आरोप लगाया।
करोड़ों की योजना के बावजूद पुराने घाटों का सहारा
गणेश विसर्जन का समय नजदीक है और नगर निगम तैयारियों में जुटा है। लेकिन करोड़ों रुपये की स्थायी योजना के बावजूद कई व्यवस्थाएं अधूरी हैं। ऐसे में इस बार भी भोपाल में पुराने घाटों और अस्थायी इंतजामों पर निर्भरता बनी रहेगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि स्थायी विसर्जन घाटों की योजना पूरी होने के लिए शहर को अब और कितना इंतजार करना पड़ेगा।