निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की शुक्रवार को हरिद्वार में मौत हो गई। उसका शव भूपतवाला इलाके में एक चाय की दुकान के अंदर फंदे पर मिला। शुरुआती जानकारी में पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही है। मामले की जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि कोली पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में नाम बदलकर रह रहा था। वह यहां एक कंपनी में काम करने के साथ चाय की दुकान भी चला रहा था।
नाम बदलकर रह रहा था
सुरेंद्र कोली कुछ महीने पहले हरिद्वार आया था। यहां वह अकेला रहता था और अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था। करीब 15 दिन पहले उसने सिडकुल की एक कंपनी में काम शुरू किया था। कंपनी में उसने अपना नाम सदाराम बताया था। इसलिए वहां काम करने वाले लोगों को उसके पुराने मामलों और असली पहचान की जानकारी नहीं थी।
चार दिन पहले ली थी चाय की दुकान
कोली ने करीब चार दिन पहले सप्तऋषि चौकी क्षेत्र में लाल मंदिर के पास सड़क किनारे एक छोटी दुकान किराए पर ली थी। यहां वह चाय बेच रहा था। पड़ोसियों के मुताबिक, उसने दुकान के मालिक को कुछ महीनों का एडवांस भी दिया था। इलाके में कुंभ की तैयारियों के चलते अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही है। पड़ोसियों का कहना है कि कोली को दुकान हटने और एडवांस पैसे फंसने की चिंता थी। हालांकि, उसकी मौत की असली वजह जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।
निठारी कांड से ऐसे जुड़ा नाम
साल 2005-06 में नोएडा के निठारी इलाके से कई बच्चे और महिलाएं गायब होने लगे थे। 29 दिसंबर 2006 को सेक्टर-31 में कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर की D-5 कोठी के पीछे नाले और आसपास से मानव अवशेष मिलने के बाद मामला सामने आया। इसके बाद पुलिस ने मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू सहायक सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार किया। जनवरी 2007 में मामले की जांच CBI को सौंप दी गई। जांच के दौरान कई अलग-अलग मामलों में कोली के खिलाफ केस दर्ज हुए। उस पर हत्या, दुष्कर्म, अपहरण और सबूत मिटाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए।
13 मामलों में मिली थी मौत की सजा
सुरेंद्र कोली को निठारी से जुड़े 13 मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, बाद में इन मामलों में उसकी दोषसिद्धि पर सवाल उठे।
2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 मामलों में उसे बरी कर दिया। कोर्ट ने उसके कथित कबूलनामे और बरामदगी से जुड़े सबूतों पर सवाल उठाए थे।30 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने भी इन 12 मामलों में बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा।
आखिरी मामले में भी हुआ था बरी
12 मामलों में राहत मिलने के बाद कोली के खिलाफ सिर्फ एक मामला बचा था। 11 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने उस मामले में भी उसकी दोषसिद्धि रद्द कर दी और उसे बरी कर दिया। इसके बाद करीब 19 साल जेल में रहने के बाद सुरेंद्र कोली बाहर आया था। कुछ समय बाद वह हरिद्वार पहुंचा और वहां अलग नाम से रहने लगा। अब उसकी मौत के बाद पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। मौत की परिस्थितियों और उससे जुड़े अन्य पहलुओं की जानकारी जांच के बाद सामने आएगी।