फर्जी पासपोर्ट मामले की जांच में STF को कई अहम सुराग मिले हैं। STF DIG राहुल लोढ़ा के मुताबिक, जांच के दौरान पासपोर्ट ऑफिस के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत सामने आई है। अब STF इस पूरे नेटवर्क में अधिकारियों की भूमिका और दस्तावेजों में किए गए कथित हेरफेर की जांच कर रही है।
गिरफ्तार पांचवें आरोपी से बड़ा खुलासा
मामले में गिरफ्तार पांचवें आरोपी नसीम अख्तर से पूछताछ में फर्जी पासपोर्ट बनाने वाले नेटवर्क को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। STF के अनुसार, नसीम अख्तर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट तैयार करवाने का काम करता था। उसके कब्जे से 8 फर्जी पासपोर्ट बरामद किए गए हैं।
रियाल चौधरी से मिलते थे पासपोर्ट
जांच के मुताबिक, फर्जी पासपोर्ट गैंग का मुख्य आरोपी बताए जा रहे रियाल चौधरी की भूमिका भी सामने आई है। STF के अनुसार, रियाल चौधरी नसीम अख्तर को पासपोर्ट तैयार करवाने के लिए दस्तावेज और अन्य जानकारी उपलब्ध कराता था। इसके बाद नसीम कथित तौर पर आगे की प्रक्रिया को अंजाम देता था।
पासपोर्ट ऑफिस में सेटिंग का दावा
STF DIG राहुल लोढ़ा के मुताबिक, पूछताछ में नसीम अख्तर ने पासपोर्ट ऑफिस के अधिकारियों के साथ कथित सेटिंग होने की जानकारी दी है। STF अब यह पता लगाने में जुटी है कि किन अधिकारियों के संपर्क में आरोपी था और किस स्तर पर दस्तावेजों में हेरफेर किया जाता था।
दस्तावेजों में हेरफेर कर बनते थे पासपोर्ट
जांच में सामने आया है कि कथित नेटवर्क में दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ कर फर्जी पहचान के आधार पर पासपोर्ट तैयार करवाए जाते थे। STF इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि फर्जी दस्तावेज कहां तैयार किए जाते थे और पासपोर्ट कार्यालय की प्रक्रिया में उन्हें किस तरह आगे बढ़ाया जाता था।
एक पासपोर्ट के लिए 25 से 30 हजार
STF के अनुसार, एक फर्जी पासपोर्ट तैयार करवाने के लिए रियाल चौधरी द्वारा नसीम अख्तर को करीब 25 से 30 हजार रुपये दिए जाते थे। अब जांच एजेंसी पूरे नेटवर्क के आर्थिक लेन-देन, संपर्कों और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।