TMC विवाद पर 4 महीने में फैसला

सुप्रीम कोर्ट के दो बड़े मामले: दिल्ली-NCR रेप केस पर सख्त टिप्पणी, TMC विवाद पर 4 महीने में फैसला

The Supreme Court expressed concern over safety in Delhi-NCR and directed a timely decision on the TMC symbol dispute.

By : सोनिया रायकवार
सुप्रीम कोर्ट के दो बड़े मामले: दिल्ली-NCR रेप केस पर सख्त टिप्पणी, TMC विवाद पर 4 महीने में फैसला

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को दिल्ली-NCR में सामने आए यौन अपराधों और तृणमूल कांग्रेस के नाम-चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद पर अहम सुनवाई हुई। एक मामले में कोर्ट ने दिल्ली-NCR में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई और हालिया घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लिया। वहीं, दूसरे मामले में कोर्ट ने चुनाव आयोग को TMC के नाम और ‘फूल-पत्ती’ चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद पर तय समयसीमा में फैसला लेने का निर्देश दिया।

चलती बस में नाबालिग से कथित गैंगरेप पर SC ने लिया संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR में हाल में सामने आए यौन अपराधों, जिसमें ग्रेटर नोएडा की चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय नाबालिग के साथ कथित गैंगरेप का मामला भी शामिल है, पर स्वतः संज्ञान लिया है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।

कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं कानून लागू करने वाली एजेंसियों और सार्वजनिक प्रशासन की ओर से बुनियादी सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में प्रणालीगत विफलता को रेखांकित करती हैं। पीठ ने दिल्ली-NCR में सामने आ रहे मामलों की तुलना 2012 के निर्भया मामले से करते हुए इसे बेहद गंभीर स्थिति बताया।

रोशनी और निगरानी जैसी व्यवस्थाओं पर भी सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पार्कों, बसों और अन्य सार्वजनिक स्थानों को महिलाओं और बच्चों के लिए असुरक्षित नहीं बनने दिया जा सकता। कोर्ट की टिप्पणी में पर्याप्त रोशनी, निगरानी और दूसरी बुनियादी प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जरूरत पर जोर दिया गया।

ग्रेटर नोएडा मामले में पुलिस के अनुसार 4 अगस्त को एक 16 वर्षीय लड़की के साथ चलती स्लीपर बस में कथित तौर पर अपराध हुआ था। मामले में बस के चालक और परिचालक को गिरफ्तार किया गया है। इस घटना के बाद दिल्ली-NCR में महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज हुई है।

TMC के नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर भी SC का आदेश

दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और ‘फूल-पत्ती’ चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद पर चुनाव आयोग को चार महीने के भीतर फैसला लेने की समयसीमा तय की है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपनी दलीलें और दस्तावेज दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इसके बाद चुनाव आयोग को तीन महीने के भीतर अपना फैसला देना होगा।

चुनाव आयोग ने विवाद के निपटारे के लिए छह महीने का समय मांगा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने चार महीने की समयसीमा तय की। मामला TMC के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल को लेकर दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच विवाद से जुड़ा है।

इस तरह सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही में एक ओर दिल्ली-NCR में सार्वजनिक सुरक्षा और महिलाओं-बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुख रहा, तो दूसरी ओर TMC के संगठनात्मक विवाद को लेकर चुनाव आयोग की प्रक्रिया के लिए समयसीमा तय की गई।

संबंधित सामग्री

सुप्रीम कोर्ट का UPI चार्ज पर रोक से इनकार, ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% MDR; केंद्र से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट का UPI चार्ज पर रोक से इनकार, ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% MDR; केंद्र से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने ₹2,000 से अधिक के UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR लागू करने के फैसले पर रोक नहीं लगाई, केंद्र से नए शुल्क ढांचे का आधार स्पष्ट करने को कहा।

ममता की रैली में जाते समय TMC विधायक कुणाल घोष की कार पर हमला, अंडे-पत्थर फेंके और पीछे का शीशा तोड़ा

ममता की रैली में जाते समय TMC विधायक कुणाल घोष की कार पर हमला, अंडे-पत्थर फेंके और पीछे का शीशा तोड़ा

पश्चिम बंगाल के उत्तरपाड़ा में TMC विधायक कुणाल घोष की कार को भीड़ ने घेर लिया, अंडे फेंके गए। घोष ममता बनर्जी की रैली में शामिल होने जा रहे थे।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नए कर्मचारियों को पूरा वेतन देने का आदेश दिया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नए कर्मचारियों को पूरा वेतन देने का आदेश दिया

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट से स्टे नहीं मिलता, तब तक परिवीक्षा अवधि में नए कर्मचारियों को 100% वेतन दिया जाना चाहिए।

भोपाल में सीलिंग कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, रहवासी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों पर रोक के निर्देश

भोपाल में सीलिंग कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, रहवासी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियों पर रोक के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने भोपाल में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर चल रही सीलिंग कार्रवाई के दौरान लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त की और सख्त निर्देश जारी किए।

झारखंड सरकार ने खनिज सेस के मुद्दे पर केंद्र सरकार के MMDR Amendment Act, 2026 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयार

झारखंड सरकार ने खनिज सेस के मुद्दे पर केंद्र सरकार के MMDR Amendment Act, 2026 को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयार

झारखंड सरकार ने MMDR Amendment Act, 2026 को चुनौती देने की तैयारी की, जिससे उनके खनिज सेस लगाने के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

Advertisement

सेवा के 25 वर्ष 14 सितम्बर से  13 ऑक्टोबर