मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने परिवीक्षा अवधि में कर्मचारियों को दिए जाने वाले 70%, 80% और 90% वेतन से जुड़े मामले में अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक सुप्रीम कोर्ट की ओर से हाईकोर्ट के पूर्व आदेश पर कोई स्थगन आदेश नहीं मिलता, तब तक राज्य सरकार को उस आदेश का पालन करना होगा।
100% वेतन देने के निर्देश
मामला नए कर्मचारियों को परिवीक्षा अवधि के दौरान कम वेतन दिए जाने की व्यवस्था से जुड़ा है। हाईकोर्ट अपने पिछले आदेश में 70%, 80% और 90% वेतन देने की व्यवस्था को असंवैधानिक और कानून के विपरीत बता चुका है। राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हालिया सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए हाईकोर्ट के आदेश को फिलहाल लागू न किया जाए। हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट के स्टे तक लागू रहेगा आदेश
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने से उसके पूर्व आदेश पर रोक नहीं लगती। जब तक सुप्रीम कोर्ट से कोई स्टे नहीं मिलता, राज्य सरकार को हाईकोर्ट के आदेश का पालन करना होगा। इसके तहत संबंधित कर्मचारियों को 100 प्रतिशत वेतन दिए जाने की व्यवस्था लागू रहेगी।
कर्मचारियों से लिया जा सकता है वचन पत्र
कोर्ट ने सरकार को एक विकल्प भी दिया है। सरकार कर्मचारियों से अंडरटेकिंग यानी वचन पत्र ले सकती है। इसमें यह प्रावधान हो सकता है कि यदि भविष्य में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला राज्य सरकार के पक्ष में आता है, तो कर्मचारियों को मिली अतिरिक्त राशि वापस करनी होगी। हाईकोर्ट के इस आदेश का असर परिवीक्षा अवधि में वेतन प्राप्त करने वाले कर्मचारियों पर पड़ सकता है। मामले में आगे की स्थिति सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही और उसके आदेश पर निर्भर करेगी।