सुप्रीम कोर्ट ने ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने के केंद्र के फैसले पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस नए शुल्क ढांचे का आधार और कानूनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए जवाब मांगा है। नया नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होना है।
तीन जजों की बेंच ने की सुनवाई
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय बेंच ने एडवोकेट अंजन दत्ता की जनहित याचिका पर सुनवाई की। याचिका में ₹2,000 की सीमा तय करने, UPI और RuPay के लिए अलग-अलग व्यवस्था तथा नए MDR ढांचे के कानूनी आधार पर सवाल उठाए गए हैं।
सरकार से पूछा- नियम का आधार क्या है?
याचिकाकर्ता ने नए शुल्क ढांचे को चुनौती देते हुए दलील दी कि इसके लिए पर्याप्त कानूनी सुरक्षा और सार्वजनिक चर्चा का अभाव है। याचिका में Payment and Settlement Systems Act, 2007 के प्रावधानों को भी चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल शुल्क पर रोक नहीं लगाई, लेकिन केंद्र से इस व्यवस्था का आधार बताते हुए जवाब मांगा है।
आम लोगों के UPI ट्रांसफर पर असर नहीं
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI ट्रांसफर पूरी तरह मुफ्त रहेगा। ₹2,000 तक के मर्चेंट पेमेंट भी MDR से मुक्त रहेंगे। सरकार के अनुसार करीब 96% P2M UPI ट्रांजैक्शन इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।
किसे देना होगा 0.4% MDR?
15 अक्टूबर से सामान्य P2M UPI ट्रांजैक्शन में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा। छोटे कारोबारियों के लिए ₹1 लाख तक के मासिक UPI कलेक्शन पर जीरो-MDR व्यवस्था जारी रहेगी। उदाहरण के तौर पर ₹10,000 के पात्र UPI मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR यानी ₹40 बनेगा। MDR पर GST भी लागू हो सकता है, हालांकि पात्र पंजीकृत व्यापारी इसे इनपुट टैक्स क्रेडिट के जरिए समायोजित कर सकते हैं।
ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा MDR
सरकार के अनुसार MDR न तो UPI इस्तेमाल करने वाले ग्राहक पर लगाया गया टैक्स है और न ही इसे सीधे ग्राहक से वसूलने का प्रावधान है। यह मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम में लगने वाली फीस है, जिसे बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और UPI ऐप जैसे सिस्टम के हिस्सेदारों के बीच बांटा जाएगा। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने नए नियम पर रोक नहीं लगाई है। अब केंद्र सरकार को अदालत के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI पेमेंट पर MDR लागू करने का कानूनी और नीतिगत आधार क्या है।