इतिहास के महान विचारक सुकरात, डार्विन और फाइनमैन ने अनिश्चितता को बुद्धिमत्ता का मूल माना। 'मुझे नहीं पता' कहने की ईमानदारी वास्तविक ज्ञान की जननी है।
शुभ लाभ
, दिव्या मिस्त्री
2026-08-09 17:15:34