योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश की बिजली आपूर्ति सामान्य रखने के प्रयास जारी हैं। बारिश के कारण कोयला आपूर्ति प्रभावित होने से कई थर्मल पावर प्लांटों का उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे प्रदेश में बिजली की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है। इसके बावजूद वैकल्पिक इंतजामों और पावर बैंकिंग के जरिए आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
बिजली उपलब्धता में 1300 मेगावाट की बढ़ोतरी
उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने अधिकारियों के साथ बिजली आपूर्ति की समीक्षा की और जरूरी दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने सभी क्षेत्रों में रोस्टर के अनुसार बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए युद्ध स्तर पर काम करने को कहा। अनपरा-डी, हरदुआगंज-ई और ओबरा-बी की यूनिट-10 का दोबारा संचालन शुरू होने से प्रदेश की बिजली उपलब्धता में औसतन करीब 1300 मेगावाट की बढ़ोतरी हुई है।
1-2 दिनों में 1250 मेगावाट और बढ़ेगी उपलब्धता
अधिकारियों के मुताबिक अगले एक-दो दिनों में कुछ और बंद इकाइयों के चालू होने की उम्मीद है। एपीजीसी, सिंगरौली की यूनिट-2, टीआरएन एनर्जी की यूनिट-1 और घाटमपुर की यूनिट-1 के उपलब्ध होने के साथ जवाहरपुर की बॉयलर ट्यूब लीकेज के कारण बंद इकाई के भी चालू होने की संभावना है। इससे प्रदेश की विद्युत उपलब्धता में करीब 1250 मेगावाट की अतिरिक्त वृद्धि हो सकती है।
केरल से 500-600 मेगावाट बिजली मिलने पर सहमति
बिजली उपलब्धता बढ़ाने के लिए पावर बैंकिंग का भी सहारा लिया जा रहा है। केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के डायरेक्टर ऑपरेशन शिव एस. दास और उनकी टीम के साथ हुई बैठक में अगले पांच वर्षों तक गर्मी के महीनों में पावर बैंकिंग के जरिए 500-600 मेगावाट बिजली प्राप्त करने पर सहमति बनी है। वर्तमान में महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से पावर बैंकिंग के माध्यम से पीक आवर्स में औसतन करीब 2400 मेगावाट बिजली प्राप्त की जा रही है।
बारिश से कोयला आपूर्ति पर असर
अधिकारियों के अनुसार कोयला खदान क्षेत्रों में अतिवृष्टि और जलभराव के कारण थर्मल पावर प्लांटों तक पर्याप्त कोयला नहीं पहुंच पा रहा है। इसका असर सिंगरौली, रिहंद, खुर्जा, मेजा, लैंको, रोजा और बारा समेत कई बिजली परियोजनाओं के उत्पादन पर पड़ा है। इस वजह से प्रदेश को औसतन 1500 से 2000 मेगावाट बिजली की कमी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद उपलब्ध संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, बंद इकाइयों को दोबारा चालू करने और दूसरे राज्यों से पावर बैंकिंग के जरिए बिजली प्राप्त करने जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।