सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) का पुनर्गठन कर दिया है। नए बोर्ड में सिनेमा, टेलीविजन और संगीत जगत से जुड़े 18 सदस्यों को शामिल किया गया है। इनमें अभिनेत्री प्रीति जिंटा, अभिनेता पंकज त्रिपाठी, सुनील शेट्टी, रुपाली गांगुली, पल्लवी जोशी और बंगाली अभिनेता प्रोसेनजीत चटर्जी जैसे नाम शामिल हैं। नए बोर्ड का गठन सिनेमैटोग्राफ एक्ट के तहत किया गया है। यह टीम तीन साल की अवधि या अगले आदेश तक काम करेगी।
18 सदस्यीय बोर्ड में कई बड़े नाम
नए CBFC बोर्ड में सिर्फ फिल्म अभिनेताओं को ही जगह नहीं दी गई है, बल्कि निर्देशन, संगीत और साहित्य से जुड़े लोगों को भी शामिल किया गया है। तीन बार ग्रैमी अवॉर्ड जीत चुके संगीतकार रिकी केज, निर्देशक प्रियदर्शन और नीला माधब पांडा भी बोर्ड का हिस्सा होंगे। इसके अलावा हंसराज हंस, मनोज जोशी, विनोद अनुपम, अभिषेक जैन, सुप्रिया यार्लागड्डा, यतींद्र मिश्र, निशिगंधा वाड, वामन केंद्रे और रमेश पतंगे को भी सदस्य बनाया गया है।
2017 के बाद पहली बार पुनर्गठन
CBFC के बोर्ड का यह पुनर्गठन करीब सात साल बाद हुआ है। इससे पहले अगस्त 2017 में बोर्ड का औपचारिक पुनर्गठन किया गया था। इस महीने की शुरुआत में CBFC बोर्ड की बैठक भी हुई थी। बताया गया कि बैठक में फिल्मों के प्रमाणन, रिवाइजिंग कमेटियों के कामकाज और इससे जुड़े नियमों पर चर्चा की गई थी।
3 साल तक जिम्मेदारी संभालेगा नया बोर्ड
केंद्र सरकार ने सिनेमैटोग्राफ एक्ट के तहत नई टीम का गठन किया है। बोर्ड के सदस्यों का कार्यकाल तीन साल या अगले आदेश तक रहेगा। CBFC फिल्मों के कंटेंट की समीक्षा के बाद उन्हें निर्धारित श्रेणियों के अनुसार प्रमाणपत्र जारी करता है। इसमें फिल्म की विषय-वस्तु, दर्शकों की आयु और प्रमाणन से जुड़े नियमों को ध्यान में रखा जाता है।
शशि शेखर वेम्पति के हाथों में कमान
पुनर्गठित बोर्ड की अध्यक्षता शशि शेखर वेम्पति करेंगे। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, वह CBFC के चेयरमैन के तौर पर संस्था की जिम्मेदारी संभालेंगे। नया बोर्ड फिल्मों के प्रमाणन, कंटेंट की समीक्षा और रिवाइजिंग कमेटियों से जुड़े कामकाज की निगरानी करेगा।
क्या है CBFC?
सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन यानी CBFC सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करने वाली एक वैधानिक संस्था है। सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए फिल्मों को CBFC से प्रमाणपत्र लेना होता है। फिल्मों को उनकी विषय-वस्तु और दर्शक वर्ग के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में प्रमाणित किया जाता है। इनमें ‘U’, ‘UA’, ‘A’ और ‘S’ जैसी श्रेणियां शामिल हैं। इनका उद्देश्य दर्शकों को यह जानकारी देना है कि कोई फिल्म किस वर्ग के लिए उपयुक्त है।