17 सितंबर 1950... गुजरात के वडनगर में जन्मे नरेंद्र मोदी आज 76 वर्ष के हो गए हैं। एक सामान्य परिवार से निकलकर देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने वाली उनकी राजनीतिक यात्रा भारतीय राजनीति के महत्वपूर्ण अध्यायों में गिनी जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी और 2025 में सरकार के प्रमुख के रूप में अपने 25वें वर्ष में प्रवेश किया। प्रधानमंत्री के 76वें जन्मदिवस के मौके पर देश के अलग-अलग हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी अवसर पर उनके सार्वजनिक जीवन के करीब चार दशक लंबे राजनीतिक सफर और सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 वर्षों की यात्रा को याद किया जा रहा है।
वडनगर से शुरू हुई कहानी
नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के मेहसाणा जिले के वडनगर में हुआ। प्रधानमंत्री की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, उनका शुरुआती जीवन सीमित संसाधनों वाले परिवार में बीता। बचपन में परिवार की मदद के लिए उन्होंने चाय की दुकान पर भी काम किया। पढ़ाई के साथ किताबें पढ़ने और वाद-विवाद में उनकी रुचि का भी उल्लेख आधिकारिक जीवन परिचय में मिलता है। छोटे शहर से शुरू हुआ यह सफर आगे चलकर संगठन, राजनीति और प्रशासन की अलग-अलग जिम्मेदारियों तक पहुंचा।
RSS से संगठन की राजनीति तक
नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने के साथ हुई। इसके बाद उन्होंने संगठन के स्तर पर काम किया और भारतीय जनता पार्टी में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। 1980 के दशक के अंत तक वह गुजरात भाजपा संगठन में सक्रिय भूमिका में आ चुके थे। संगठन के काम के दौरान गुजरात के अलग-अलग हिस्सों में उनकी सक्रियता बढ़ी और यहीं से उनकी राजनीतिक पहचान मजबूत होती गई।
2001 में गुजरात की कमान
7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उस समय राज्य 2001 के कच्छ भूकंप समेत कई चुनौतियों से गुजर रहा था। प्रधानमंत्री की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, उस दौर में पुनर्निर्माण और राज्य के विकास को लेकर कई पहलें आगे बढ़ाई गईं। मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी ने गुजरात में बुनियादी ढांचे, बिजली, पानी, निवेश, शिक्षा और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई कार्यक्रमों पर जोर दिया।
ज्योतिग्राम से बिजली व्यवस्था पर जोर
गुजरात में ग्रामीण बिजली आपूर्ति को लेकर ज्योतिग्राम योजना को एक प्रमुख पहल के तौर पर पेश किया गया। इसका उद्देश्य गांवों में बिजली आपूर्ति को बेहतर और अधिक व्यवस्थित बनाना था। इसी दौर में जल प्रबंधन, सिंचाई और ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़ी योजनाओं को भी आगे बढ़ाया गया।
वाइब्रेंट गुजरात से निवेश पर फोकस
2003 में शुरू हुआ वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट राज्य में निवेश आकर्षित करने के प्रमुख मंचों में शामिल हुआ। इसके जरिए गुजरात को देश और दुनिया के निवेशकों के सामने औद्योगिक और कारोबारी केंद्र के रूप में प्रस्तुत किया गया। समय के साथ इस समिट में देश-विदेश की कंपनियों और प्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ी।
शिक्षा और प्रशासन में बदलाव
कन्या केलवणी अभियान और शाला प्रवेशोत्सव जैसे अभियानों के जरिए स्कूलों में नामांकन और बालिका शिक्षा पर जोर दिया गया। वहीं ई-गवर्नेंस के जरिए सरकारी सेवाओं और प्रशासन में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ाने की कोशिश हुई। गुजरात में साबरमती रिवरफ्रंट, BRTS और बाद में GIFT City जैसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भी राज्य के विकास मॉडल की चर्चा का हिस्सा बने।
2014 में दिल्ली की ओर बढ़ा सफर
गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर करीब 13 वर्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय राजनीति में कदम बढ़ाया। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश किया। 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद उन्होंने दूसरी बार और 2024 के चुनाव के बाद तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।
जन-धन से वित्तीय समावेशन
प्रधानमंत्री के तौर पर शुरुआती वर्षों में प्रधानमंत्री जन-धन योजना के जरिए बैंकिंग सेवाओं से दूर लोगों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया गया। जीरो-बैलेंस खातों के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ने का अभियान चलाया गया।
स्वच्छ भारत से स्वच्छता अभियान
2 अक्टूबर 2014 को शुरू किए गए स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता और खुले में शौच की समस्या को राष्ट्रीय अभियान का रूप दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण और व्यवहार परिवर्तन पर विशेष जोर दिया गया।
मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भरता
मेक इन इंडिया अभियान के जरिए भारत में विनिर्माण और निवेश को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। बाद के वर्षों में आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा, सेमीकंडक्टर और अन्य क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
डिजिटल इंडिया और UPI की पहचान
डिजिटल इंडिया अभियान के जरिए सरकारी सेवाओं और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को विस्तार देने पर जोर दिया गया। UPI ने डिजिटल भुगतान को बड़े स्तर पर आम लोगों तक पहुंचाया और भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की वैश्विक चर्चा बढ़ी।
उज्ज्वला योजना से रसोई गैस तक पहुंच
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत पात्र गरीब परिवारों की महिलाओं को LPG कनेक्शन उपलब्ध कराने की पहल की गई। इसका उद्देश्य पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करना और स्वच्छ खाना पकाने के ईंधन तक पहुंच बढ़ाना था।
नोटबंदी से GST तक बड़े फैसले
8 नवंबर 2016 को केंद्र सरकार ने 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोटों को चलन से बाहर करने की घोषणा की। इसके बाद डिजिटल भुगतान और औपचारिक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई। 2017 में वस्तु एवं सेवा कर यानी GST लागू किया गया। इसका उद्देश्य देश में कई अप्रत्यक्ष करों की जगह एक व्यापक GST व्यवस्था स्थापित करना था।
आयुष्मान भारत और स्वास्थ्य पर जोर
आयुष्मान भारत योजना के जरिए पात्र परिवारों को अस्पताल में इलाज के लिए स्वास्थ्य कवरेज उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू की गई। इसके साथ ही स्वास्थ्य क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर और बीमा कवरेज के विस्तार को लेकर भी कई पहलें हुईं।
किसानों के लिए PM-KISAN
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत पात्र किसान परिवारों को प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता देने की व्यवस्था शुरू की गई। योजना के तहत पात्र किसानों को सालाना 6,000 रुपये की सहायता तीन किस्तों में दी जाती है।
2019 के बाद बड़े संवैधानिक फैसले
अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से संबंधित संवैधानिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया। अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को प्रभावी रूप से हटाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों—जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख—में पुनर्गठित करने का फैसला लिया गया। इसी अवधि में नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA भी संसद से पारित हुआ। कानून ने पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए कुछ निर्दिष्ट गैर-मुस्लिम समुदायों के लिए भारतीय नागरिकता प्राप्त करने का विशेष रास्ता बनाया, यदि वे निर्धारित शर्तें पूरी करते हों।
कोरोना काल में टीकाकरण अभियान
2020 में कोरोना महामारी के दौरान देशव्यापी लॉकडाउन और स्वास्थ्य संकट के बीच केंद्र सरकार ने टीकाकरण अभियान शुरू किया। भारत का कोविड-19 टीकाकरण अभियान दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियानों में शामिल रहा और 2022 में देश ने 200 करोड़ वैक्सीन डोज का आंकड़ा पार किया।
जल जीवन मिशन
ग्रामीण घरों तक पाइप से पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से जल जीवन मिशन शुरू किया गया। इस मिशन के तहत ग्रामीण परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराने के लिए देशभर में जलापूर्ति ढांचे के विस्तार पर काम किया गया।
नारी शक्ति पर केंद्रित कानून
महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद से पारित किया गया। इसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया गया है, जिसे परिसीमन और संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया के बाद लागू किया जाना है।
G20 की मेजबानी से वैश्विक मंच तक
2023 में भारत ने G20 की अध्यक्षता की। दिल्ली में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन के दौरान अफ्रीकी संघ को स्थायी सदस्य के रूप में शामिल किया गया। भारत की अध्यक्षता में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, जलवायु, विकास और वैश्विक दक्षिण से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का ऐतिहासिक अवसर
22 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समारोह में मुख्य अतिथियों में शामिल रहे और उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार
प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में हाईवे, रेलवे, एयरपोर्ट, मेट्रो, वंदे भारत ट्रेन और नमो भारत जैसी परियोजनाओं के विस्तार पर जोर दिया गया। इसके साथ ही डिफेंस कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स और आधुनिक शहरी परिवहन को लेकर भी कई परियोजनाएं आगे बढ़ीं।
25 साल सरकार के प्रमुख के तौर पर
नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। अक्टूबर 2025 में उन्होंने सरकार के प्रमुख के तौर पर अपने 25वें वर्ष में प्रवेश किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने अपने सार्वजनिक जीवन की यात्रा को याद करते हुए लोगों के प्रति आभार जताया था और कहा था कि उनका लगातार प्रयास लोगों के जीवन में सुधार और देश की प्रगति में योगदान देना रहा है। इस तरह 2001 में गुजरात से शुरू हुआ मुख्यमंत्री का सफर 2014 में देश के प्रधानमंत्री पद तक पहुंचा और 2024 में तीसरे कार्यकाल के साथ आगे बढ़ा।
76वें जन्मदिन पर ‘सेवा’ पर फोकस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस के मौके पर इस वर्ष उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों को भी कार्यक्रमों के केंद्र में रखा जा रहा है। भाजपा की ओर से ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जन्मदिन के अवसर पर सेवा गतिविधियों, जनसंपर्क और सामाजिक कार्यक्रमों के जरिए इस अभियान को आगे बढ़ाने की योजना है।
एक सफर, कई पड़ाव
वडनगर की गलियों से शुरू हुई नरेंद्र मोदी की सार्वजनिक जीवन की यात्रा गुजरात के मुख्यमंत्री कार्यालय से होते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंची। इस दौरान संगठन की राजनीति, राज्य प्रशासन, राष्ट्रीय राजनीति, आर्थिक सुधार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, सामाजिक योजनाओं और वैश्विक कूटनीति जैसे कई क्षेत्र उनके राजनीतिक सफर का हिस्सा रहे।
76वें जन्मदिवस पर उनकी करीब चार दशक लंबी राजनीतिक यात्रा और सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 वर्षों का यह सफर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है।