सिंगरौली प्रदूषण समस्या

’10 साल सांसद रही, खत लिखे… लेकिन कुछ नहीं हुआ!’ सिंगरौली के प्रदूषण पर पूर्व MP रीति पाठक का छलका दर्द

सिंगरौली की पूर्व सांसद रीति पाठक ने प्रदूषण के मुद्दे को फिर से उठाया, कहा पिछले प्रयासों के बावजूद कार्रवाई अपेक्षित नहीं हुई।

By : दिव्या मिस्त्री
’10 साल सांसद रही, खत लिखे… लेकिन कुछ नहीं हुआ!’ सिंगरौली के प्रदूषण पर पूर्व MP रीति पाठक का छलका दर्द

सिंगरौली।मध्य प्रदेश की ऊर्जाधानी कहे जाने वाले सिंगरौली में औद्योगिक गतिविधियों के साथ प्रदूषण का मुद्दा लगातार चर्चा में रहा है। इसी बीच पूर्व सांसद और वर्तमान में सीधी से विधायक रीति पाठक के कथित बयान ने इस मुद्दे को फिर सुर्खियों में ला दिया है। उन्होंने अपने सांसद कार्यकाल के दौरान प्रदूषण को लेकर किए गए प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने लगातार पत्राचार किया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी। हालांकि, उपलब्ध संसदीय रिकॉर्ड में भी पाठक ने सिंगरौली के वायु प्रदूषण और पेयजल की समस्या को सदन में उठाया था।

10 साल तक सांसद रहीं, प्रदूषण पर लगातार उठाती रहीं आवाज

सिंगरौली के प्रदूषण को लेकर रीति पाठक पहले भी संसद में अपनी चिंता जाहिर कर चुकी हैं। मार्च 2020 में लोकसभा में उन्होंने कहा था कि सिंगरौली में बड़ी औद्योगिक और ऊर्जा परियोजनाओं के कारण लोगों के लिए स्वच्छ हवा में सांस लेना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बलियरी और गोड़वाली जैसे इलाकों में धूल और स्वच्छ पेयजल की समस्या का भी उल्लेख किया था।

पत्राचार के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का दावा

प्रेस वार्ता में पूछे गए सवाल पर पाठक ने कथित तौर पर कहा कि उन्होंने प्रदूषण को लेकर कई पत्र लिखे, लेकिन जमीन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। उनके इस बयान का अर्थ प्रशासनिक और संबंधित विभागों की कार्रवाई को लेकर सवाल के रूप में लिया जा रहा है। हालांकि, इस दावे के संबंध में पत्रों की पूरी संख्या और प्रत्येक पत्र पर हुई कार्रवाई का स्वतंत्र रिकॉर्ड सामने आना बाकी है।

सिंगरौली की प्रदूषण समस्या कितनी गंभीर?

सिंगरौली में कोयला खनन और ताप विद्युत परियोजनाओं के कारण प्रदूषण को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। न्यायिक रिकॉर्ड में भी क्षेत्र में वायु और जल प्रदूषण से जुड़े मुद्दों का उल्लेख हुआ है। 2021 के एक मामले में सिंगरौली क्षेत्र को कोयला खदानों और कोयला आधारित बिजली संयंत्रों वाला प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र बताया गया था।

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