हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित वित्तीय लाभों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के बकाया भुगतान को चरणबद्ध तरीके से कर रही है। सरकार किसी के दबाव में आकर फैसला नहीं लेगी, बल्कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए वित्तीय लाभों का भुगतान किया जाएगा। जैसे-जैसे राज्य की ट्रेजरी मजबूत होगी, कर्मचारियों और पेंशनरों के सभी लंबित वित्तीय लाभ दिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) को लेकर पिछली भाजपा सरकार और केंद्र पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में हिमाचल को करीब 47 हजार करोड़ रुपये की RDG मिली थी, जबकि कांग्रेस सरकार को अब तक केवल करीब 17 हजार करोड़ रुपये की RDG प्राप्त हुई है। सुक्खू ने कहा कि अब यह ग्रांट भी बंद कर दी गई है।
RDG मिलती रहती तो एरियर चुकाने की स्थिति में होते
सुक्खू ने कहा कि अगर वर्तमान सरकार को भी पिछली भाजपा सरकार की तरह RDG मिलती रहती, तो कर्मचारियों और पेंशनरों का एरियर चुकाने के साथ-साथ प्रदेश के कर्ज को भी कम किया जा सकता था।
उन्होंने भाजपा सरकार पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि करीब 47 हजार करोड़ रुपये की RDG मिलने के बावजूद उस समय कर्मचारियों को केवल 50-50 हजार रुपये का एरियर दिया गया था। वहीं, मौजूदा सरकार के कार्यकाल में 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 तक के संशोधित वेतनमान के एरियर में तृतीय श्रेणी के पेंशनरों को करीब 55 फीसदी भुगतान किए जाने का दावा मुख्यमंत्री ने किया।
अलग-अलग श्रेणियों में किया गया भुगतान
मुख्यमंत्री के मुताबिक, चतुर्थ श्रेणी के पेंशनरों को पे एरियर के तौर पर 20 हजार रुपये का भुगतान किया गया है। वहीं प्रथम और द्वितीय श्रेणी के पेंशनरों को 15 फीसदी एरियर दिया जा चुका है।
सुक्खू ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने RDG बंद नहीं की होती तो हिमाचल सरकार सभी कर्मचारियों का एरियर चुकाने की स्थिति में होती। उन्होंने कर्मचारियों से प्रदेश की मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और RDG में हुई कमी को समझने की अपील भी की।
भ्रष्टाचार पर लगाम का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब 10 हजार करोड़ रुपये की RDG बंद होने का असर प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर पड़ा है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने भ्रष्टाचार के रास्ते बंद किए हैं और ट्रेजरी में आने वाले राजस्व का इस्तेमाल कर्मचारियों और पेंशनरों को उनके वित्तीय लाभ देने के लिए किया जा रहा है।
PM मोदी पर भी साधा निशाना
सुक्खू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि आपदा के दौरान राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री से 1,500 करोड़ रुपये की मांग नहीं की थी। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री ने खुद ट्वीट कर इस राशि की घोषणा की थी, लेकिन एक साल बीतने के बावजूद हिमाचल को यह रकम नहीं मिली है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा के दौरान राहत और बचाव कार्यों के लिए राज्य सरकार ने अपनी ट्रेजरी से ही खर्च किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की वित्तीय सीमाओं के बावजूद सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध संसाधनों के आधार पर भुगतान कर रही है।