हरियाणा में परिवार पहचान पत्र यानी Family ID से जुड़ी शिकायतों के समाधान को लेकर सरकार ने अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने Family ID में सुधार से संबंधित मामलों को स्थानीय स्तर पर जल्द निपटाने के लिए अधिकारियों को व्यापक अधिकार देने की जानकारी दी है। सरकार का फोकस अब शिकायतों के त्वरित निपटारे के साथ-साथ सरकारी योजनाओं के लाभ के लिए पात्रता की जांच को अधिक प्रभावी बनाने पर है।
आय को छोड़कर Family ID में सुधार के लिए ADC को अधिकार
मुख्यमंत्री के अनुसार, Family ID में सुधार से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए अतिरिक्त उपायुक्तों (ADC) को व्यापक अधिकार दिए गए हैं। हालांकि, आय से संबंधित जानकारी में सुधार को इस व्यवस्था से अलग रखा गया है।
सरकार का मानना है कि इस अधिकार के बाद लोगों को Family ID से जुड़ी छोटी-बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। शिकायतों का निपटारा स्थानीय प्रशासन के स्तर पर ही किए जाने से प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है।
मकान और फ्लैट योजनाओं में पात्रता की जांच पर जोर
Family ID से जुड़े बदलावों के साथ ही सरकार ने मकान और फ्लैट जैसी योजनाओं के लाभार्थियों की पात्रता जांच को लेकर भी व्यवस्था पर जोर दिया है। इसके तहत परिवार की आय और पात्रता का सत्यापन ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराने की बात कही गई है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ निर्धारित पात्रता रखने वाले परिवारों तक ही पहुंचे। स्थानीय स्तर पर सत्यापन होने से लाभार्थियों की वास्तविक स्थिति की जांच में भी मदद मिल सकती है।
गलत सत्यापन पर कर्मचारियों के खिलाफ होगी कार्रवाई
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई कर्मचारी गलत सत्यापन के जरिए अपात्र व्यक्ति को सरकारी योजना का लाभ दिलाने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सरकार की ओर से दिया गया यह निर्देश Family ID और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े सत्यापन की प्रक्रिया में जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे अधिकारियों और कर्मचारियों पर सही जानकारी के आधार पर पात्रता निर्धारित करने की जिम्मेदारी और बढ़ेगी।

Family ID हरियाणा में सरकारी योजनाओं और सेवाओं से जुड़े परिवारों के रिकॉर्ड का एक महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में इसमें सुधार से जुड़ी शिकायतों के स्थानीय स्तर पर समाधान और योजनाओं के लाभार्थियों के सत्यापन की व्यवस्था का सीधा असर आम परिवारों पर पड़ सकता है।