हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर शनिवार को निशाना साधते हुए चुनावी वादों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। सैनी ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए कुल 56 वादों में से कितने वादे अब तक पूरे किए गए हैं।
नायब सिंह सैनी ने कहा कि पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव नजदीक है और ऐसे में जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि सरकार ने अपने वादों को कितना पूरा किया है और बाकी घोषणाओं को पूरा करने के लिए उसके पास कितना समय बचा है।
हरियाणा सीएम सैनी
“जनता को मिलना चाहिए वादों का हिसाब”
हरियाणा के मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने चुनाव के दौरान पंजाब की जनता से कई बड़े वादे किए थे, लेकिन अब सरकार को इन वादों की प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए और उन्हें अपने चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सैनी ने यह भी सवाल उठाया कि अगर कुछ वादे अभी तक पूरे नहीं हुए हैं तो उन्हें पूरा करने की समयसीमा क्या होगी। उन्होंने कहा कि पंजाब के लोग यह जानना चाहते हैं कि सरकार ने उनके हितों से जुड़े मुद्दों पर क्या काम किया है।

भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी उठाए सवाल
नायब सिंह सैनी ने पंजाब सरकार की भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने राज्य में सरकारी भर्तियों को लेकर उठ रहे विवादों का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था मिलनी चाहिए। इससे पहले भी सैनी पंजाब सरकार पर युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर हमला बोल चुके हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि रोजगार और भर्ती जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए, क्योंकि युवा वर्ग अपने भविष्य को लेकर चिंतित है।
पंजाब सीएम भगवंत मान
पंजाब की राजनीति में बढ़ी बयानबाजी
नायब सिंह सैनी के इस बयान को पंजाब की सियासत में बढ़ती राजनीतिक गर्मी से जोड़कर देखा जा रहा है। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए विपक्षी दलों ने राज्य सरकार की योजनाओं और घोषणाओं को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
वहीं, आम आदमी पार्टी सरकार लगातार अपने कार्यकाल की उपलब्धियों को गिनाते हुए दावा करती रही है कि उसने जनता से किए कई वादों को पूरा किया है। अब चुनावी माहौल के बीच चुनावी घोषणाओं और उनके क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।