रायपुर। महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप के प्रमुख संचालक सौरभ चंद्राकर की ओमान में गिरफ्तारी के बाद अब उसके कथित फर्जी पासपोर्ट को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। वायरल हो रहे दस्तावेज में तस्वीर सौरभ चंद्राकर की बताई जा रही है, जबकि पासपोर्ट में नाम श्रीलंकाई क्रिकेटर अजंता मेंडिस के नाम पर दर्ज है। जांच एजेंसियां इस पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं और आशंका जताई जा रही है कि यह पहचान छिपाने और प्रत्यर्पण प्रक्रिया से बचने की रणनीति हो सकती है।
इसकी वैधता 21 जून 2034 तक बताई गई
जांच एजेंसियों के अनुसार, सौरभ चंद्राकर ने कथित तौर पर फर्जी पासपोर्ट के जरिए ओमान में प्रवेश किया था। पासपोर्ट संख्या E3387986 वाले इस दस्तावेज में अलग पहचान और जन्मतिथि दर्ज होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह पासपोर्ट 21 जून 2024 को जारी हुआ था और इसकी वैधता 21 जून 2034 तक बताई गई है।
पहचान अलग-अलग दर्ज मिली
एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी पहचान तैयार करने में किस नेटवर्क की मदद ली गई और इस दस्तावेज का इस्तेमाल किन देशों में किया गया। जांच में यह भी सामने आया है कि सौरभ चंद्राकर और उसके सहयोगी रवि उप्पल ने पहले वानूआतू की नागरिकता हासिल की थी। वहीं, अलग-अलग दस्तावेजों में उनकी जन्मतिथि और पहचान अलग-अलग दर्ज मिली है।
सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन बुक मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और CBI इस मामले में हजारों करोड़ रुपये के कथित अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी, मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रहे हैं।
नोटिस हटाने की मांग वाली याचिका खारिज
हाल ही में इंटरपोल की Commission for the Control of INTERPOL’s Files (CCF) ने सौरभ चंद्राकर की रेड नोटिस हटाने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी। CCF ने माना कि मामला वित्तीय अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है।
अधिकारियों के मुताबिक, फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल ओमान के कानून में गंभीर अपराध माना जाता है। अब ओमान में हुई गिरफ्तारी के बाद भारत में उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।