गणेश चतुर्थी का पर्व देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। 2026 में गणेश उत्सव 14 सितंबर से 25 सितंबर तक मनाया जा रहा है। भगवान गणेश को माता पार्वती और भगवान शिव का पुत्र तथा भगवान कार्तिकेय का भाई माना जाता है। गणेश जी के परिवार के बारे में तो लगभग सभी जानते हैं, लेकिन उनकी बहन, पुत्री, पुत्र, बहुओं और पोतों से जुड़ी मान्यताएं काफी रोचक हैं। आइए जानते हैं गणेश जी के परिवार से जुड़ी प्रमुख धार्मिक मान्यताओं के बारे में।
कौन हैं गणेश जी की बहन?
धार्मिक मान्यताओं में अशोक सुंदरी को भगवान शिव और माता पार्वती की पुत्री तथा गणेश जी की बहन बताया गया है। एक कथा के अनुसार माता पार्वती की इच्छा से अशोक सुंदरी का जन्म हुआ था। उनका विवाह राजा नहुष से हुआ था। कुछ परंपराओं में भगवान शिव की अन्य पुत्रियों का भी उल्लेख मिलता है। इनमें जया, विषहर, शामिलबारी, देव और दोतलि के नाम बताए जाते हैं। वहीं मनसा देवी और ज्योति का भी कुछ धार्मिक कथाओं में शिव की पुत्री के रूप में वर्णन मिलता है। हालांकि अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में इन संबंधों को लेकर मतभेद मिलते हैं।
गणेश जी की पत्नियां कौन हैं?
मान्यता के अनुसार भगवान गणेश की दो पत्नियां हैं—ऋद्धि और सिद्धि। इन्हें समृद्धि, सफलता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। कई धार्मिक कथाओं में ऋद्धि और सिद्धि को गणेश जी की शक्तियों के रूप में भी वर्णित किया गया है।
कौन हैं गणेश जी के पुत्र शुभ और लाभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश जी और ऋद्धि-सिद्धि के दो पुत्र माने जाते हैं—शुभ और लाभ। शुभ को कुछ परंपराओं में क्षेम नाम से भी जाना जाता है। इसी वजह से घरों और दुकानों में भगवान गणेश के साथ ‘शुभ-लाभ’ लिखने की परंपरा काफी लोकप्रिय है। इसे सुख, समृद्धि और सफलता से जोड़कर देखा जाता है।
गणेश जी की पुत्री संतोषी माता की कथा
मान्यता के अनुसार भगवान गणेश की एक पुत्री भी थीं, जिनका नाम संतोषी बताया जाता है। संतोषी माता की उत्पत्ति से जुड़ी एक लोकप्रिय कथा भाई-बहन के प्रेम और रक्षासूत्र से जुड़ी है। कथा के अनुसार गणेश जी अपनी बहन से रक्षासूत्र बंधवा रहे थे। यह देखकर उनके पुत्र शुभ और लाभ ने भी बहन होने की इच्छा जताई। उन्होंने गणेश जी से पूछा कि रक्षासूत्र का क्या महत्व है। गणेश जी ने उन्हें बताया कि यह केवल धागा नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्रेम, आशीर्वाद और सुरक्षा का प्रतीक है। इसके बाद शुभ और लाभ ने भी एक बहन की इच्छा जताई। मान्यता के अनुसार भगवान गणेश ने अपनी शक्तियों से एक ज्योति उत्पन्न की, जो बाद में कन्या के रूप में प्रकट हुईं। इसी कन्या को संतोषी नाम दिया गया और आगे चलकर वे संतोषी माता के रूप में प्रसिद्ध हुईं।
गणेश जी के पोते और बहुओं के नाम
कुछ धार्मिक मान्यताओं में गणेश जी के पुत्रों शुभ और लाभ की पत्नियों के नाम तुष्टि और पुष्टि बताए गए हैं। वहीं उनके पौत्रों के रूप में आमोद और प्रमोद के नाम मिलते हैं। इस तरह मान्यता के अनुसार भगवान गणेश का परिवार काफी विस्तृत है—माता-पिता भगवान शिव और माता पार्वती, भाई कार्तिकेय, बहन अशोक सुंदरी, पत्नियां ऋद्धि और सिद्धि, पुत्र शुभ और लाभ तथा पुत्री संतोषी माता। उनके परिवार से जुड़ी ये कथाएं भारतीय धार्मिक परंपराओं में अलग-अलग रूपों में मिलती हैं।