भोपाल में फर्जी पासपोर्ट रैकेट का भंडाफोड़

बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट का नेटवर्क, 3 साल पहले विदेश मंत्रालय ने दी थी चेतावनी

मध्यप्रदेश में फर्जी पासपोर्ट बनवाने के लिए बांग्लादेशी नागरिकों का एक नेटवर्क भोपाल से डबरा तक फैला हुआ पाया गया है, जिसमें 100 से अधिक फर्जी पासपोर्ट शामिल हैं।

By : दिव्या मिस्त्री
बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट का नेटवर्क, 3 साल पहले विदेश मंत्रालय ने दी थी चेतावनी

भोपाल। बांग्लादेशी नागरिकों के फर्जी भारतीय दस्तावेज तैयार कर पासपोर्ट बनवाने वाले रैकेट का नेटवर्क भोपाल से डबरा तक फैला होने का खुलासा हुआ है। जानकारी के मुताबिक विदेश मंत्रालय ने वर्ष 2023 में मध्यप्रदेश में फर्जी पासपोर्ट बनाए जाने को लेकर पुलिस मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी थी। उस समय प्रदेश में करीब 70 संदिग्ध फर्जी पासपोर्ट सामने आए थे। अब यह संख्या 100 से अधिक होने की आशंका जताई जा रही है।

गोविंदपुरा के एक पते से बने 40 पासपोर्ट

जांच में सामने आया है कि भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र के एक ही पते का इस्तेमाल कर करीब 40 फर्जी पासपोर्ट तैयार किए गए। पासपोर्ट के आवेदन संबंधित जिलों के पासपोर्ट सेल में पुलिस वेरिफिकेशन के लिए भेजे जाते थे। डबरा में हुए पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। आरोप है कि कई मामलों में दस्तावेज और पते की मौके पर जांच नहीं की गई।

आवेदन पहुंचने से पहले थाने पर आता था फोन

मामले की जांच में एक और गंभीर सवाल सामने आया है। संदिग्ध पासपोर्ट आवेदन भोपाल से डबरा पहुंचने से पहले ही थाने पर फोन आ जाता था। फोन करने वाला आवेदन को अर्जेंट बताते हुए जल्द वेरिफिकेशन कराने की बात कहता था। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फोन कौन करता था और उसे आवेदन की जानकारी पहले से कैसे मिलती थी।

मास्टरमाइंड के भी बने चार फर्जी पासपोर्ट

रैकेट के कथित मास्टरमाइंड रियाल चौधरी को लेकर भी अहम जानकारी सामने आई है। उसके नाम से चार पासपोर्ट बने हैं और आरोप है कि चारों में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। बताया गया कि उसने डबरा के दो स्थानीय दलालों के माध्यम से दस्तावेज तैयार कराए थे।

पूछताछ के बाद पांच टीमें जांच में जुटीं

एसपी राजेश भदौरिया के अनुसार रियाल से पूछताछ के बाद पांच अलग-अलग टीमें गठित कर विभिन्न स्थानों पर भेजी गई हैं। टीमें फर्जी दस्तावेज तैयार करने, पासपोर्ट वेरिफिकेशन और पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं।

भोपाल में पहले भी सामने आया था मामला

फर्जी पासपोर्ट का नेटवर्क इससे पहले भी सामने आ चुका है। वर्ष 2025 में भोपाल के कोलार क्षेत्र में किराए के मकान के पते का इस्तेमाल कर दो बांग्लादेशी भाइयों के फर्जी भारतीय दस्तावेज और पासपोर्ट तैयार कराने का मामला सामने आया था। दिसंबर 2025 में पश्चिम बंगाल में भी बांग्लादेशी नागरिकों के करीब 400 फर्जी पासपोर्ट से जुड़ा मामला सामने आया था।

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