भोपाल के कलियासोत डैम के वेटलैंड क्षेत्र में आयोजित मड रैली अब बड़े विवाद का कारण बन गई है। पर्यावरणविदों ने इस आयोजन को जैव विविधता और जलीय जीवों के लिए गंभीर खतरा बताते हुए आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। साथ ही मामले को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में भी चुनौती देने की तैयारी शुरू हो गई है। यह रैली रविवार को हुई, जिसमें 50 से अधिक गाड़ियों और सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया।
NGT के आदेश की अनदेखी का आरोप
पर्यावरणविद् राशिद नूर का कहना है कि वर्ष 2019 में इसी तरह की मड रैली के खिलाफ NGT में याचिका दायर की गई थी। इसके बाद जनवरी 2020 में NGT ने देशभर के वेटलैंड क्षेत्रों में मड रैली जैसे आयोजनों पर रोक लगा दी थी। तत्कालीन भोपाल कलेक्टर ने भी इसी आदेश के आधार पर एक प्रस्तावित रैली की अनुमति निरस्त कर दी थी। बावजूद इसके दोबारा ऐसा आयोजन होना प्रशासनिक लापरवाही माना जा रहा है।
वन्यजीवों और पर्यावरण पर खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार कलियासोत डैम और आसपास के क्षेत्र में मगरमच्छ, घड़ियाल, कई जलीय पक्षी और अन्य जीवों के घोंसले मौजूद हैं। इसके अलावा यह इलाका बाघ और तेंदुओं की आवाजाही के लिए भी जाना जाता है। भारी वाहनों की आवाजाही, तेज शोर और भीड़भाड़ से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
प्रशासन की कार्यवाही शुरू
रैली के दौरान कई वाहन आपस में टकराए और कुछ युवक घायल भी हुए, लेकिन पुलिस और जिला प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी। मामले के सामने आने के बाद टीटी नगर एसडीएम अर्चना शर्मा ने जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि आयोजन अवैध पाया गया तो आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। साथ ही हर शनिवार और रविवार को क्षेत्र में निगरानी के लिए विशेष टीम तैनात की जाएगी।
सोशल मीडिया से होता है आयोजन
पर्यावरणविदों का दावा है कि मड रैली की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती। आयोजन से जुड़े लोग व्हाट्सएप ग्रुप और सोशल मीडिया नेटवर्क के जरिए सीमित लोगों को ही सूचना देते हैं। इसी वजह से प्रशासन को समय रहते इसकी जानकारी नहीं मिल पाती। अब पर्यावरण प्रेमियों ने मांग की है कि वेटलैंड क्षेत्र में वाहनों के प्रवेश पर सख्ती बढ़ाई जाए और नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।