भोपाल के आवासीय इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुका है। सीलिंग की कार्रवाई, रहवासियों और व्यापारियों के विरोध के बीच 15 सितंबर को इस मामले में अहम सुनवाई होनी है। दूसरी ओर, राज्य सरकार भोपाल के नए मास्टर प्लान को लागू करने की तैयारी कर रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि सरकार मास्टर प्लान की घोषणा कर देती है, तो क्या आवासीय इलाकों में चल रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को तत्काल राहत मिल जाएगी? अर्बन एक्सपर्ट कुलश्रेष्ठ के मुताबिक, ऐसा तुरंत होना संभव नहीं है। सरकार अगर अभी मास्टर प्लान की घोषणा करती है, तब भी इसे जमीन पर लागू होने में कम से कम छह महीने का समय लग सकता है। इसके बाद ही मिक्स्ड लैंड यूज और कमर्शियल गतिविधियों को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
21 साल से नए मास्टर प्लान का इंतजार
अर्बन एक्सपर्ट कुलश्रेष्ठ के मुताबिक, किसी भी शहर के सुनियोजित और व्यवस्थित विकास के लिए मास्टर प्लान बेहद जरूरी होता है। भोपाल में वर्ष 2005 के बाद नया मास्टर प्लान नहीं बना है। ऐसे में शहर का विकास करीब 21 साल पुराने मास्टर प्लान के आधार पर होता रहा। एक्सपर्ट का कहना है कि यदि समय पर नया मास्टर प्लान लागू होता तो शहर में बढ़ती कमर्शियल गतिविधियों के लिए अलग-अलग क्षेत्रों की पहचान पहले ही की जा सकती थी। उसी के अनुसार सड़कों की चौड़ाई, पार्किंग, सीवेज सिस्टम, बिजली व्यवस्था और पानी की पाइपलाइन जैसी सुविधाएं विकसित की जातीं। नए मास्टर प्लान के अभाव में कई आवासीय क्षेत्रों में धीरे-धीरे व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ती चली गईं। अरेरा कॉलोनी के मामले के बाद ऐसे कई प्रतिष्ठानों को चिन्हित किया गया।
मिक्स्ड लैंड यूज में भी देना होगा डायवर्सन शुल्क
एक्सपर्ट के अनुसार किसी आवासीय क्षेत्र या सड़क को मिक्स्ड लैंड यूज में शामिल करने के लिए भी निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। वर्तमान व्यवस्था में आवासीय क्षेत्र के लिए 10 प्रतिशत कंपाउंडिंग का प्रावधान बताया गया है, लेकिन आवासीय क्षेत्र में कमर्शियल उपयोग को लेकर अलग नियम लागू होते हैं। यदि सरकार अरेरा कॉलोनी, बावड़ियाकलां, रोहित नगर जैसे बड़े इलाकों को मिक्स्ड लैंड यूज के दायरे में लाती है, तो सिर्फ घोषणा से समस्या का समाधान नहीं होगा। वहां पार्किंग, सीवेज, बिजली और पानी जैसी सुविधाओं के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित करना होगा। इसके अलावा जिन भवनों को व्यावसायिक उपयोग के लिए अनुमति मिलेगी, उनके डायवर्सन की प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी। इसके लिए निर्धारित राशि चुकानी पड़ सकती है, जिसकी रकम सरकार तय करेगी।
डायवर्सन और इंफ्रास्ट्रक्चर में लग सकता है 4 से 6 महीने का समय
कुलश्रेष्ठ के मुताबिक, मिक्स्ड लैंड यूज लागू होने के बाद भी संबंधित भवनों को नियमों के अनुसार डायवर्ट करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस पूरी प्रक्रिया में करीब चार से छह महीने का समय लग सकता है। यानी मास्टर प्लान की घोषणा और व्यावसायिक गतिविधियों को वैध करने के बीच तत्काल राहत की स्थिति नहीं बनेगी। सरकार को पहले संबंधित क्षेत्रों की स्थिति, इंफ्रास्ट्रक्चर की क्षमता और व्यावसायिक उपयोग के नियमों को तय करना होगा। इसके बाद भवनों के डायवर्सन और शुल्क से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ऐसे में व्यापारियों और रहवासियों के लिए सिर्फ मास्टर प्लान की घोषणा पर्याप्त नहीं होगी। उन्हें वास्तविक राहत के लिए सरकार की अधिसूचना, नियमों और सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का इंतजार करना पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिका पूरा मामला
भोपाल में आवासीय भवनों के व्यावसायिक उपयोग और अवैध निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है। अगस्त के पहले सप्ताह में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा गठित 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। साथ ही मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से दुकान संचालकों को मिले राहत संबंधी आदेश भी निरस्त कर दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसके निर्देश पर चल रही जांच में हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब 15 सितंबर को मामले की अगली सुनवाई होनी है। नगर निगम को कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट भी पेश करनी है। इसी के चलते शहर में नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई तेज हुई है।
8 हजार से ज्यादा नोटिस, 190 प्रतिष्ठान बंद
नगर निगम की कार्रवाई के तहत एक सप्ताह में 8 हजार से ज्यादा नोटिस जारी किए गए हैं। वहीं, करीब 190 प्रतिष्ठान या तो स्वेच्छा से बंद हुए या फिर उन्हें सील किया गया। बताया गया है कि शहर में कुल करीब 62 हजार नोटिस दिए जाने की तैयारी थी, लेकिन शुरुआती कार्रवाई के दौरान ही नगर निगम को विरोध का सामना करना पड़ा। कार्रवाई को लेकर व्यापारियों और प्रतिष्ठान संचालकों में नाराजगी बढ़ती गई। कई लोगों का कहना है कि वर्षों से चल रही गतिविधियों पर अचानक कार्रवाई से कारोबार प्रभावित हो रहा है। दूसरी ओर, प्रशासन का पक्ष नियमों के पालन और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई करने पर केंद्रित है। अब आगे की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का असर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कार्रवाई के विरोध में चार बार सड़क पर उतरे व्यापारी
नगर निगम की कार्रवाई के विरोध में भोपाल के व्यापारियों ने कई बार प्रदर्शन किया। रोशनपुरा-न्यू मार्केट क्षेत्र में व्यापारियों ने करीब चार घंटे तक प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी और हाथापाई की नौबत तक पहुंच गई। प्रदर्शन के कारण हजारों दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद रखीं और रोशनपुरा चौराहे पर यातायात भी प्रभावित हुआ। इसके बाद कोलार व्यापारी महासंघ के आह्वान पर कोलार रोड का बाजार बंद रखा गया। इस बंद में डी-मार्ट और शराब की दुकानें भी बंद रहने की बात सामने आई। अवधपुरी, रायसेन रोड समेत कई अन्य इलाकों में भी व्यापारी कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन कर चुके हैं।
अब 15 सितंबर की सुनवाई पर टिकी नजर
भोपाल में कमर्शियल गतिविधियों को लेकर फिलहाल तीन स्तरों पर घटनाक्रम आगे बढ़ रहा है—सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, नगर निगम की कार्रवाई और नए मास्टर प्लान की तैयारी। सरकार यदि मास्टर प्लान लागू करने की दिशा में आगे बढ़ती है, तब भी एक्सपर्ट के मुताबिक तत्काल राहत मिलने की संभावना नहीं है। मिक्स्ड लैंड यूज, डायवर्सन शुल्क और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने जैसी प्रक्रियाओं में समय लगेगा। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट में 15 सितंबर की सुनवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में भोपाल के व्यापारी, रहवासी और प्रशासन सभी की नजर अब सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश और सरकार के रुख पर टिकी हुई है।