भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 13 सितंबर को भोपाल की आरसीव्हीपी नरोन्हा प्रशासन-प्रबंधकीय अकादमी में आयोजित मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के 32वें स्थापना दिवस कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। उन्होंने आयोग द्वारा प्रकाशित विषय आधारित "स्मारिका" और डायरी का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में सीएम डॉ. यादव ने मिशन कर्मयोगी के तहत "साधना सप्ताह" में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग 32वां पड़ाव पूरा कर रहा है। उसका ध्येय वाक्य है, हम सब बराबर, बराबर हमारे अधिकार। हमारी सनातन संस्कृति में यह वाक्य आदी काल से चला आ रहा है। हमारे वेद वाक्य में भी यत पिंडे तत ब्रह्मांडे यानी जैसा हमारा शरीर है, वैसा ब्रह्मांड है। जो मुझ में है, वो तुझमें है। उन्होंने कहा कि हमने केवल मनुष्य नहीं, प्रकृति मात्र से वही भाव रखा है। 84 लाख योनियों के साथ हमने इस मानव जीवन को पाया है। इस योनी के बाद फिर दो मार्ग निकलते हैं। एक हमें पुण्य मार्ग की ओर ले जाता है, दूसरा हमें जन्म-मरण के मार्ग पर ले जाता है।
गुलामी की मानसिकता में रहना दुर्भाग्यपूर्ण
पीमुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज दुनिया भारत और भारत की विशेषताओं को समझती जा रही है। लोकतांत्रिक मूल्यों के आधार पर मानव अधिकार का काम महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जो कहते हैं, वो करके दिखाते हैं। दुर्भाग्य की बात है कि कांग्रेस के शासनकाल में ऐसे लोगों को महिमा मंडित किया था, जिन्होंने देश पर ग़ुलाम बनकर रखा था। जिनके कारण हमारी आज़ादी कलंकित और लज्जित हुई, ऐसे लोगों के नाम पर शासन द्वारा मार्गों के नाम रखे गए।

सभी को मिले समान सम्मान
सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आजादी के पहले हमारे हाथ में कुछ नहीं था, लेकिन आजादी के बाद तो हम नियंत्रित कर सकते थे। बालाघाट का नक्सलवाद और नक्सली तो हमारे सामने ही थे। नक्सलियों की वजह से कितनी चुनौतियां समाज के सामने उठ खड़ी हुईं। लोगों ने वोट की राजनीति के चलते इन पर कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में नकारात्मक माहौल बना हुआ है। वे मानवाधिकार की बात तो करते रहेंगे, लेकिन लाभ भी देखेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड काल में मानवाधिकार के आधार पर अपने नागरिकों की भी जान बचाई और दुनिया को दवाई देकर जीयो और जीने दो के अधिकार को पुनः स्थापित किया। हमारी सरकार इसी संकल्प के साथ सबको समान अवसर और सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है।