बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय का नाम अब 'मां वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी', कार्य परिषद ने दी मंजूरी

बरकतउल्ला विवि का नाम परिवर्तन

बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय का नाम अब 'मां वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी', कार्य परिषद ने दी मंजूरी

भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलकर 'वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय' किया जाएगा। इसे राजा भोज की विरासत से जोड़ने के लिए यह प्रस्ताव दिया गया है।

बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय का नाम अब मां वाग्देवी भोजपाल यूनिवर्सिटी कार्य परिषद ने दी मंजूरी

भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने की कवायद अब एक कदम और आगे बढ़ गई है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद (ईसी) ने बुधवार को संस्थान का नाम "वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय" करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब यह प्रस्ताव राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल के पास अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा गया है।

राजा भोज की विरासत से जोड़ने का तर्क

बैठक में प्रस्ताव के समर्थन में कहा गया कि राजा भोज मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत के प्रतीक हैं। इसी आधार पर विश्वविद्यालय का नाम उनके नाम से जोड़ने की बात रखी गई। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि नया नाम प्रदेश की गौरवशाली परंपरा को और मजबूती से प्रदर्शित करेगा।

अकादमिक ढांचे में भी होंगे बदलाव

नाम परिवर्तन के साथ-साथ विश्वविद्यालय के अकादमिक ढांचे में भी बदलाव का निर्णय लिया गया है। अरबी और पर्शियन जैसे विषयों को एकीकृत कर "तुलनात्मक भाषा एवं संस्कृति विभाग" के रूप में पुनर्गठित किया जाएगा। इससे विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के तुलनात्मक अध्ययन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

विधानसभा में लाना होगा संशोधन विधेयक

किसी सरकारी विश्वविद्यालय का नाम बदलने के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक होता है। कार्यपरिषद की मंजूरी के बाद प्रस्ताव उच्च शिक्षा विभाग और राज्य सरकार को भेजा जाएगा। इसके बाद संबंधित अधिनियम में संशोधन के लिए विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत किया जाएगा। विधानसभा और राज्यपाल की मंजूरी के बाद राजपत्र अधिसूचना जारी होने पर नया नाम आधिकारिक रूप से लागू हो जाएगा।

फैसले पर शुरू हुआ विरोध और समर्थन

विश्वविद्यालय की ईसी सदस्य डॉ. ताहिरा अब्बासी ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि बरकतउल्ला भोपाली एक स्वतंत्रता सेनानी थे और उनके नाम को बदलना उचित नहीं होगा। वहीं भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा शिवपुरी ने सोशल मीडिया पर इस निर्णय का स्वागत किया है। दूसरी ओर श्री हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच सहित कई संगठनों ने भी प्रस्ताव पर खुशी जताते हुए इसे ऐतिहासिक फैसला बताया है।
 

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