चुनावी रण के करीब पहुंच चुके पंजाब में कांग्रेस ने बड़ा सियासी दांव चलते हुए साफ कर दिया है कि वह विधानसभा चुनाव बिना मुख्यमंत्री पद के चेहरे के लड़ेगी। पार्टी ने सामूहिक नेतृत्व के आधार पर चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया है। कांग्रेस हाईकमान के इस निर्णय को प्रदेश में पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी और नेताओं के दबाव के बीच एक कड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
पिछले कुछ महीनों में कांग्रेस नेतृत्व ने कई राज्यों में संगठन और सत्ता से जुड़े अहम फैसले लेते हुए यह संकेत दिया है कि पार्टी अब व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के बजाय संगठनात्मक अनुशासन और चुनावी रणनीति को प्राथमिकता देगी। हालांकि पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन नहीं करने के फैसले के बाद प्रदेश कांग्रेस में लगातार असंतोष देखने को मिल रहा है।
कांग्रेस का चुनावी चिन्ह
चन्नी और समर्थकों के विरोध से बढ़ी पार्टी की मुश्किलें
पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी के साथ कुछ अन्य नेताओं ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के नेतृत्व को लेकर सवाल खड़े किए हैं। चन्नी गुट की ओर से मुख्यमंत्री चेहरे के रूप में खुद को आगे बढ़ाने की कोशिशों के बीच कांग्रेस हाईकमान ने सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है।
पंजाब कांग्रेस के प्रभारी और महासचिव भूपेश बघेल ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि पार्टी किसी एक चेहरे के बजाय सभी नेताओं को साथ लेकर चुनावी मुकाबले में उतरेगी। इसे चन्नी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वह मुख्यमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार के तौर पर अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे थे।
कई राज्यों में हाईकमान ने लिए कड़े फैसले
कांग्रेस नेतृत्व ने हाल के दिनों में कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और गोवा जैसे राज्यों में कई ऐसे फैसले लिए हैं, जो पार्टी के भीतर मौजूद कुछ नेताओं की पसंद के विपरीत थे। कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर हुए बदलाव का फैसला इसी रणनीति का उदाहरण माना गया।
पंजाब के कांग्रेस संसद
इसी तरह केरल में चुनावी सफलता के बाद पार्टी ने संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की दावेदारी को दरकिनार करते हुए लोकप्रिय नेता वीडी सतीशन को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया। तमिलनाडु में भी कांग्रेस ने अपनी राजनीतिक रणनीति में बदलाव करते हुए नए समीकरण तैयार किए।
कर्नाटक में भी दिखा अनुशासन का संदेश
कर्नाटक में डीके शिवकुमार सरकार के हालिया मंत्रिमंडल विस्तार में कांग्रेस हाईकमान ने कई नए और युवा चेहरों को मौका दिया, जबकि कुछ वरिष्ठ नेताओं को जगह नहीं मिली। इससे नाराज कुछ विधायकों ने इस्तीफे की धमकी दी, लेकिन शिवकुमार ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया कि पार्टी अनुशासन से समझौता नहीं करेगी।
पंजाब में फिलहाल नहीं थम रही गुटबाजी
हालांकि पंजाब में कांग्रेस की सख्ती का असर अभी पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा है। चरणजीत सिंह चन्नी और राजा वडिंग के समर्थकों के बीच लगातार बयानबाजी जारी है। दोनों गुटों के बीच टकराव इतना बढ़ गया है कि अब प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल के खिलाफ भी असंतोष के स्वर उठने लगे हैं।
पंजाब के कांग्रेस कार्यकर्ता
इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व ने संकेत दे दिया है कि वह कुछ नेताओं के दबाव में अपनी चुनावी रणनीति बदलने के मूड में नहीं है। पार्टी का मानना है कि सामूहिक नेतृत्व के साथ चुनाव लड़ना ही पंजाब में उसकी वापसी की संभावनाओं को मजबूत कर सकता है।