फिट रहने के लिए लोग अपनी दिनचर्या में अलग-अलग तरह की एक्सरसाइज शामिल करते हैं। कोई वॉकिंग और रनिंग करता है तो कोई कार्डियो या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को प्राथमिकता देता है। स्क्वाट भी एक ऐसी एक्सरसाइज है, जिसे बिना किसी खास जिम इक्विपमेंट के घर पर किया जा सकता है। स्क्वाट मुख्य रूप से शरीर के निचले हिस्से की मांसपेशियों पर काम करता है। अगर इसे सही तकनीक और अपनी क्षमता के अनुसार नियमित रूप से किया जाए, तो कुछ हफ्तों में ताकत और एक्सरसाइज क्षमता में बदलाव महसूस हो सकता है। हालांकि, इसके परिणाम उम्र, फिटनेस लेवल, डाइट और नियमितता जैसे कई कारकों पर निर्भर करते हैं।
पैरों की मांसपेशियां मजबूत
स्क्वाट करते समय जांघों, हिप्स और पैरों की कई मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। नियमित अभ्यास से इनकी ताकत और सहनशक्ति बेहतर हो सकती है। इससे सीढ़ियां चढ़ने, बैठने और उठने जैसी रोजमर्रा की गतिविधियां आसान महसूस हो सकती हैं।
ग्लूट्स और हिप्स को मजबूती
स्क्वाट में ग्लूट्स यानी हिप्स की मांसपेशियां भी सक्रिय रहती हैं। सही फॉर्म के साथ लगातार अभ्यास करने से इन मांसपेशियों की स्ट्रेंथ और टोनिंग में सुधार हो सकता है। हालांकि, केवल स्क्वाट करने से शरीर के किसी खास हिस्से की चर्बी कम होना तय नहीं है। फैट लॉस के लिए पूरे शरीर की गतिविधि और संतुलित खान-पान जरूरी है।
बैलेंस और स्थिरता बेहतर
स्क्वाट में शरीर को नियंत्रित करते हुए नीचे जाना और फिर ऊपर उठना होता है। नियमित अभ्यास से पैरों और शरीर के बीच कोऑर्डिनेशन बेहतर करने में मदद मिल सकती है। इससे बैलेंस और मूवमेंट कंट्रोल में भी सुधार हो सकता है।
रोजमर्रा के काम में मदद
बैठना और उठना हमारी रोज की सामान्य गतिविधियां हैं और स्क्वाट इसी तरह के मूवमेंट पैटर्न पर आधारित है। इसका नियमित अभ्यास इन गतिविधियों के लिए जरूरी मांसपेशियों की क्षमता को बनाए रखने और बेहतर करने में मदद कर सकता है।
एक्सरसाइज क्षमता बढ़ेगी
शुरुआत में कुछ स्क्वाट करने पर ही पैरों में थकान महसूस हो सकती है। लेकिन धीरे-धीरे शरीर इस गतिविधि का आदी होने लगता है। नियमित अभ्यास से मांसपेशियों की सहनशक्ति बेहतर हो सकती है और समय के साथ व्यक्ति पहले की तुलना में ज्यादा रेपिटिशन कर सकता है।
स्क्वाट करने का सही तरीका
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सीधे खड़े हों और दोनों पैरों के बीच कंधे जितनी दूरी रखें।
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दोनों हाथ सामने रखें या अपनी सुविधा के अनुसार पोजीशन में रखें।
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घुटनों को मोड़ते हुए धीरे-धीरे नीचे जाएं, जैसे कुर्सी पर बैठ रहे हों।
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शरीर का वजन पैरों पर रखें और छाती को जरूरत से ज्यादा आगे न झुकाएं।
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घुटनों को पैरों की दिशा में रखें और उन्हें अंदर की ओर जाने से बचाएं।
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अपनी क्षमता के अनुसार नीचे जाएं और फिर एड़ियों से दबाव देते हुए धीरे-धीरे वापस खड़े हों।
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शुरुआत में कम रेपिटिशन करें और फॉर्म सही होने पर धीरे-धीरे संख्या बढ़ाएं।
रोज कितने स्क्वाट करें?
शुरुआत करने वाले लोग अपनी क्षमता के अनुसार 8-12 स्क्वाट के 1-2 सेट से शुरुआत कर सकते हैं। शरीर को इसकी आदत होने पर धीरे-धीरे रेपिटिशन या सेट बढ़ाए जा सकते हैं। हर दिन बहुत ज्यादा स्क्वाट करने के बजाय शरीर को पर्याप्त आराम देना भी जरूरी है। अगर स्क्वाट करते समय घुटने या कमर में दर्द महसूस हो, तो एक्सरसाइज रोक दें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लें।
एक महीने में क्या बदलाव होगा?
एक महीने तक नियमित स्क्वाट करने से पैरों की ताकत, मांसपेशियों की सहनशक्ति और मूवमेंट कंट्रोल में सुधार की शुरुआत हो सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति में परिणाम एक जैसे नहीं होते। बेहतर फिटनेस के लिए स्क्वाट के साथ वॉकिंग या अन्य कार्डियो गतिविधियां, पर्याप्त नींद और संतुलित डाइट को भी दिनचर्या में शामिल करना जरूरी है।