प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग ऐप RummyCulture और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग जांच में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने 25 सितंबर 2026 को जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत करीब 442.35 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं। ED के मुताबिक, अटैच की गई संपत्तियों में फिक्स्ड डिपॉजिट, कमर्शियल दुकानें, एक विला और कई रिहायशी संपत्तियां शामिल हैं।
ये संपत्तियां Gameskraft Technologies Pvt. Ltd. के शेयरधारकों के परिवार के सदस्यों, प्राइवेट फैमिली ट्रस्ट और उनसे जुड़ी विभिन्न कंपनियों के नाम पर थीं।

FIR से शुरू हुई मनी लॉन्ड्रिंग जांच
ED के अनुसार, तेलंगाना में स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसी (LEA) की ओर से दर्ज कई FIR के आधार पर PMLA के तहत जांच शुरू हुई। इन FIR में धोखाधड़ी से जुड़े ऐसे अपराधों के आरोप हैं, जिन्हें PMLA के तहत अनुसूचित अपराध माना गया है।
जांच के तहत ED ने 7 से 14 मई 2026 के बीच Gameskraft Technologies के कार्यालय और कंपनी के निदेशकों तथा प्रमुख कर्मचारियों के ठिकानों पर तलाशी ली। इसके बाद 20 और 21 जून को भी सर्च ऑपरेशन चलाया गया। एजेंसी के मुताबिक, इन कार्रवाइयों में दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जब्त किए गए।
3 करोड़ यूजर्स और प्रतिबंधित राज्यों से भी खिलाड़ी

ED के मुताबिक Gameskraft Technologies और RummyTime Technologies ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग कारोबार चला रही थीं। इनके प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन रमी गेम और टूर्नामेंट आयोजित किए जाते थे। RummyCulture, RummyPrime, Playship और RummyTime इनके प्रमुख ऐप और ब्रांड बताए गए हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार, इन प्लेटफॉर्म पर करीब 3 करोड़ यूजर्स थे। इनमें बड़ी संख्या ऐसे राज्यों के यूजर्स की भी थी, जहां ऑनलाइन रियल-मनी गेमिंग पर प्रतिबंध था। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु का उल्लेख जांच में किया गया है। ED का दावा है कि कंपनियां यूजर्स के स्टेकिंग या वैजरिंग अमाउंट पर करीब 10 से 15 प्रतिशत प्लेटफॉर्म कमीशन लेती थीं।
BOT इस्तेमाल करने का आरोप
जांच में ED ने आरोप लगाया है कि कंपनियां यूजर्स को गेमिंग प्लेटफॉर्म को पारदर्शी और निष्पक्ष बताती थीं, जबकि कथित तौर पर BOT यानी ऑटोमेटेड प्रोग्राम और एल्गोरिदम का इस्तेमाल किया जाता था। एजेंसी के मुताबिक, इन BOTs का इस्तेमाल यूजर्स की जानकारी या सहमति के बिना उनके खिलाफ किया गया, जिससे कई यूजर्स को आर्थिक नुकसान हुआ।
ED के अनुसार, नए खिलाड़ियों को जोड़ने और पुराने यूजर्स को बनाए रखने के लिए कंपनियों ने करीब 1,035 करोड़ रुपये मार्केटिंग और प्रमोशनल अभियानों पर खर्च किए। बोनस, रेफरल इंसेंटिव, फ्री टूर्नामेंट एंट्री और अन्य रिवॉर्ड के जरिए यूजर्स को लगातार गेम खेलने और पैसा जमा करने के लिए प्रोत्साहित किए जाने का आरोप है।
निकासी पर लेवी और ‘Super Booster’ का आरोप
ED के मुताबिक, कुछ मामलों में यूजर्स के लिए पैसे निकालना मुश्किल बनाया गया और 5 से 10 प्रतिशत तक withdrawal levy लगाए जाने की बात सामने आई। एजेंसी का आरोप है कि ‘Super Booster’ जैसे ऑफर के जरिए withdrawable balance को non-withdrawable ‘Game Cash’ में बदलने के लिए यूजर्स को प्रेरित किया जाता था।
जांच एजेंसी का दावा है कि आर्थिक नुकसान झेल चुके या गेमिंग छोड़ चुके यूजर्स को भी इंस्टेंट कैश क्रेडिट, प्रमोशनल ऑफर, SMS, पुश नोटिफिकेशन और टेलीमार्केटिंग कॉल के जरिए दोबारा प्लेटफॉर्म पर लाने का प्रयास किया गया।
₹1,906 करोड़ की अटैचमेंट पहले हो चुकी
ED के मुताबिक, गेमिंग गतिविधियों से हासिल कथित अपराध की रकम को डिविडेंड और शेयर बायबैक के जरिए शेयरधारकों तक पहुंचाया गया और बाद में इसे म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, इक्विटी, कन्वर्टिबल नोट्स तथा महंगी चल-अचल संपत्तियों में निवेश किया गया।
एजेंसी ने पहले करीब 1,906 करोड़ रुपये की संपत्तियां प्रोविजनली अटैच की थीं। इसके अलावा करीब 495 करोड़ रुपये की चल संपत्तियां फ्रीज करने तथा 11 लाख रुपये नकद और करीब 2.30 किलोग्राम सोना, हीरे और बुलियन जब्त करने की जानकारी दी गई है।
ED के अनुसार, ताजा 442.35 करोड़ रुपये की कार्रवाई के बाद मामले में अटैच, फ्रीज और जब्त कथित प्रोसीड्स ऑफ क्राइम की कुल कीमत करीब 2,843 करोड़ रुपये हो गई है।