आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: बोले-स्ट्रीट डॉग्स को खाना खिलाने वाले उन्हें घर ले जाएं

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आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: बोले-स्ट्रीट डॉग्स को खाना खिलाने वाले उन्हें घर ले जाएं

आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त बोले-स्ट्रीट डॉग्स को खाना खिलाने वाले उन्हें घर ले जाएं

सुप्रीम कोर्ट आवारा कुत्ते: आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और इससे बच्चों व बुजुर्गों की जान को हो रहे खतरे पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बेहद सख्त टिप्पणी की. कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि कुत्तों में एक ऐसा खतरनाक वायरस पाया जाता है, जिसका अब तक कोई इलाज नहीं है और इसके गंभीर परिणाम सामने आ चुके हैं.इसलिए स्ट्रीट डॉग्स को खाना खिलाने वाले उन्हें अपने घर ले जाए

सुप्रीम कोर्ट आवारा कुत्ते: 9 साल के बच्चे पर किया था हमला

जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने सवाल उठाया. कि जब एक 9 साल के बच्चे पर आवारा कुत्ते हमला करते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या वह संगठन जो उन्हें सड़कों पर खाना खिला रहा है या फिर राज्य प्रशासन?. कोर्ट ने कहा कि इस गंभीर सामाजिक समस्या से आंखें मूंदकर नहीं बैठा जा सकता। बच्चों और बुजुर्गों की जान किसी भी तरह की लापरवाही की कीमत नहीं बन सकती। Also Read-बांग्लादेश में हिंदुओं का नरसंहार, एक और हिंदू की हत्या, 23 दिनों में 7वीं घटना 

सुप्रीम कोर्ट आवारा कुत्ते: डॉग लवर्स घर ले जाएं कुत्तों को

अदालत ने आवारा कुत्तों को सार्वजनिक स्थानों पर खाना खिलाने वालों पर भी सवाल खड़े किए। कोर्ट ने स्पष्ट कहा  जो लोग खुद को डॉग लवर्स कहते हैं और सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाते हैं, वे एक काम करें उन्हें अपने घर ले जाएं. पीठ ने कहा कि केवल खाना खिलाकर जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता। अगर कोई व्यक्ति या संगठन यह दावा करता है कि वह आवारा कुत्तों की देखभाल कर रहा है, तो उसे उनकी पूरी जिम्मेदारी भी लेनी होगी। Also Read-मोहन सरकार की आज एक और बड़ी बैठक.. महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही मोहन सरकार

राज्य सरकार को चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कुत्तों के काटने से किसी बच्चे या बुजुर्ग की मौत होती है या वह गंभीर रूप से घायल होता है, तो संबंधित राज्य सरकार के खिलाफ भारी मुआवजा तय किया जाएगा.कोर्ट ने कहा कि यह समय आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि ठोस जवाबदेही तय करने का है. सरकारें यह नहीं कह सकतीं कि वे कुछ नहीं कर पा रहीं, जबकि आम नागरिकों की जान खतरे में है।  

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