मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य योजनाओं के लिए State Single Nodal Agency (S-SNA) मॉडल लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित योजनाओं में धन के प्रवाह को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित, कुशल और प्रभावी बनाना है।
एक योजना-एक बैंक खाते की व्यवस्था
S-SNA मॉडल के तहत अलग-अलग क्रियान्वयन एजेंसियों के कई बैंक खातों में सरकारी राशि रखने के बजाय प्रत्येक चिन्हित योजना के लिए एक केंद्रीकृत S-SNA Mother Account बनाया जाएगा। योजना के लिए राशि आवश्यकता के अनुसार उपलब्ध कराई जाएगी और वास्तविक भुगतान के समय संबंधित Zero Balance Subsidiary Account (ZBSA) के जरिए सीधे हितग्राही या वेंडर के खाते में पैसा पहुंचेगा। इससे सरकारी धन लंबे समय तक अलग-अलग खातों में निष्क्रिय पड़े रहने की समस्या कम होगी और उपलब्ध राशि का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा।
रियल-टाइम मॉनिटरिंग से बढ़ेगी जवाबदेही
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का लक्ष्य योजनाओं के लिए उपलब्ध प्रत्येक रुपये का अधिकतम और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना है। उनके मुताबिक S-SNA मॉडल से सरकारी धन के प्रवाह में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी और योजनाओं के क्रियान्वयन की रियल-टाइम निगरानी संभव होगी। डिजिटल सिस्टम में Maker-Checker आधारित ऑडिट ट्रेल की व्यवस्था होने से वित्तीय लेन-देन की निगरानी मजबूत होगी। इससे अनधिकृत भुगतान और वित्तीय अनियमितताओं की संभावनाओं को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
वित्तीय अनुशासन मजबूत करने पर जोर
वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि S-SNA मॉडल राज्य के वित्तीय प्रबंधन को आधुनिक, तकनीक-सक्षम और परिणामोन्मुख बनाएगा। उनके अनुसार जिस राशि की तत्काल आवश्यकता नहीं है, उसे पहले से अलग-अलग बैंक खातों में रखने के बजाय जरूरत के समय ही उपयोग में लाया जाएगा। इससे राज्य की नकदी प्रबंधन क्षमता बेहतर होगी और अनावश्यक रूप से सरकारी धन के निष्क्रिय पड़े रहने की स्थिति कम होगी। साथ ही अनावश्यक ऋण और उस पर लगने वाले ब्याज के भार को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
530 करोड़ की निष्क्रिय राशि पर भी नियंत्रण
प्रस्तावित व्यवस्था के जरिए विभागीय खातों में लंबे समय से पड़ी निष्क्रिय राशि को नियंत्रित करने पर भी जोर दिया गया है। सरकार के अनुसार वर्तमान व्यवस्था में विभागीय निष्क्रिय खातों में लगभग 530 करोड़ रुपये और RBI के DEAF खातों में करीब 100 करोड़ रुपये की निष्क्रिय राशि जैसी स्थिति सामने आती है। S-SNA मॉडल में राशि को आवश्यकता के समय जारी करने की व्यवस्था से ऐसे निष्क्रिय फंड को कम करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा योजना की राशि के प्रबंधन से अर्जित ब्याज राज्य की संचित निधि में जमा किया जाएगा।
छह चरणों में होगा S-SNA मॉडल का क्रियान्वयन
S-SNA व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके लिए छह प्रमुख चरण निर्धारित किए गए हैं। इनमें योजना की पहचान, वित्त विभाग से अनुमोदन, Scheme Code आवंटन, e-Kosh Mapping, S-SNA और ZBSA खाते खोलना तथा Treasury से S-SNA के माध्यम से हितग्राही या वेंडर को भुगतान शामिल है। इस मॉडल में DBT और Non-DBT दोनों तरह के भुगतान शामिल किए जा सकेंगे। जिला, ब्लॉक, पंचायत और ग्राम स्तर की चिन्हित क्रियान्वयन एजेंसियों को भी इसके दायरे में लाया जा सकेगा। हालांकि PFMS-SNA/SPARSH के तहत आने वाली केंद्र प्रायोजित योजनाएं, Central Sector योजनाएं और ऐसी योजनाएं जिनमें DDO सीधे e-Kosh के माध्यम से भुगतान करते हैं, इस व्यवस्था से बाहर रहेंगी। मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद S-SNA मॉडल से जुड़ी आगे की आवश्यक कार्यवाही के लिए वित्त विभाग को अधिकृत किया गया है। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से राज्य योजनाओं में निधि प्रवाह अधिक पारदर्शी और अनुशासित होगा तथा वित्तीय प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।