शिक्षक दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के शिक्षकों और गुरुजनों के नाम भावपूर्ण पत्र लिखा। उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन की यादें साझा करते हुए शिक्षा हासिल करने के दौरान सामने आई मुश्किलों का जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से अपील की कि वे हर बच्चे की प्रतिभा को पहचानें और खासतौर पर उन विद्यार्थियों का हाथ थामें, जो आर्थिक तंगी, संकोच या दूसरी परिस्थितियों के कारण पीछे रह जाते हैं। मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा कि आज जब उन्हें प्रदेश के बच्चों की शिक्षा और भविष्य से जुड़े फैसले लेने की जिम्मेदारी मिली है, तब बचपन के दिन और भी याद आते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में व्यक्ति कितना भी आगे बढ़ जाए, अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव हमेशा बना रहता है।
बगिया से शुरू हुआ सफर
मुख्यमंत्री साय ने अपने बचपन का जिक्र करते हुए बताया कि उनका जन्म जशपुर जिले के बगिया गांव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ। उनकी शुरुआती पढ़ाई भी गांव के स्कूल से हुई। बचपन में ही परिवार पर बड़ी जिम्मेदारी आ गई। जब वे करीब 10 साल के थे और चौथी कक्षा में पढ़ रहे थे, तब उनके पिता का निधन हो गया। इसके बाद परिवार और खेती की जिम्मेदारियां भी कम उम्र में उनके सामने आ गईं। गांव में पांचवीं तक पढ़ाई करने के बाद आगे की शिक्षा के लिए उन्हें कुनकुरी जाना पड़ा। वहां लोयोला उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में रहकर उन्होंने पढ़ाई की। हालांकि, पारिवारिक परिस्थितियों के चलते आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख सके। इसके बाद उन्होंने खेती संभालने के साथ छोटे भाइयों की शिक्षा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी उठाई।
स्लेट से स्मार्ट क्लास तक
मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था में आए बदलाव को भी अपने पत्र में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उनकी पीढ़ी ने स्लेट, तख्ती और चॉक से पढ़ाई शुरू की थी, जबकि आज छत्तीसगढ़ के बच्चे स्मार्ट क्लास और डिजिटल माध्यमों के जरिए पढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक ने विद्यार्थियों के लिए दुनिया भर के ज्ञान तक पहुंच आसान कर दी है। दूरस्थ क्षेत्रों में भी बेहतर स्कूल, आधुनिक संसाधन और शिक्षा के नए अवसर पहुंच रहे हैं। हालांकि, इन बदलावों के बीच शिक्षक की भूमिका आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक जानकारी उपलब्ध करा सकती है और किताबें ज्ञान दे सकती हैं, लेकिन बच्चे के भीतर आत्मविश्वास पैदा करने, उसकी प्रतिभा पहचानने और उसके संस्कार गढ़ने का काम एक संवेदनशील शिक्षक ही कर सकता है। उन्होंने अपने जीवन में गुरुजनों से मिली सीख को भी याद किया और कहा कि कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने का हौसला उन्हें शिक्षकों से मिला।
हर बच्चे को मिले मौका
सीएम साय ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियों के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई न रुके। उन्होंने कहा कि किसी बच्चे का भविष्य इस बात से तय नहीं होना चाहिए कि उसका जन्म किसी छोटे गांव, वनांचल या दूरदराज के इलाके में हुआ है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप छत्तीसगढ़ में शिक्षा को अधिक आधुनिक, सहज और व्यावहारिक बनाने पर काम किया जा रहा है। मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं में पढ़ाई के अवसर बढ़ाने के साथ कौशल आधारित शिक्षा, डिजिटल लर्निंग, स्मार्ट क्लास और आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों का विस्तार किया जा रहा है।
शिक्षक पहचानें प्रतिभा
मुख्यमंत्री साय ने अपने पत्र में शिक्षकों को बदलाव की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताया। उन्होंने कहा कि कक्षा में बैठा हर बच्चा अपने भीतर अलग क्षमता और संभावनाएं लेकर आता है। कोई आगे चलकर वैज्ञानिक बन सकता है तो कोई डॉक्टर, खिलाड़ी, किसान, कलाकार, शिक्षक या जनसेवक। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चों को खुद अपनी क्षमता का अंदाजा नहीं होता। ऐसे में शिक्षक की नजर उनकी प्रतिभा को पहचान सकती है। शिक्षक की ओर से कही गई प्रोत्साहन की एक बात भी बच्चे के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।