भोपाल/इंदौर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 5 सितंबर को प्रदेश के 200 से अधिक युवा अधिकारियों डीईओ, डीपीसी, बीईओ और शिक्षकों से सीधा संवाद किया। मौका था शिक्षक दिवस के अवसर पर इंदौर के सांदीपनि शासकीय अहिल्या आश्रम कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-1 में आयोजित कार्यक्रम ‘एजुकेशन डायलॉग’ का। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासन ने शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर युवा प्रशासनिक शक्ति को सीधे मैदानी नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी है। बड़ी संख्या में युवा शिक्षक भी विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण का कार्य कर रहे हैं। इन युवाओं की प्रदेश के शिक्षा परिदृश्य में सकारात्मक नवाचार लाने में महती भूमिका है। कार्यक्रम में उन्होंने देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को किया और शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दीं।

गौरतलब है कि पारंपरिक शासकीय बैठकों से अलग यह कार्यक्रम खुले विचार-विमर्श, अनुभव साझा करने और मार्गदर्शन का मंच बना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में मौजूद युवा अधिकारियों से उनके मैदानी अनुभवों, चुनौतियों और किए जा रहे नवाचारों के संबंध में चर्चा की तथा उनसे शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए उनके दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं को जाना। इन युवा शिक्षा अधिकारियों ने अपने जिलों और शालाओं में इंटरेक्टिव पैनल के उपयोग, एप से विद्यार्थियों की अटेंडेंस मार्क करने, सीसीटीवी आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम, सीएसआर के माध्यम से किए जा रहे नवाचारों के बारे में जानकारी दी।

युवा सोच, तकनीकी समझ और नवाचार की क्षमता का पूरा उपयोग करें
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज के युवा शिक्षा अधिकारी तकनीक को समझते हैं, तेजी से सीखते हैं। पुरानी समस्याओं को नए तरीके से देखने और समाधान खोजने की उनकी क्षमता शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने शिक्षा अधिकारियों से अपेक्षा की, कि वे अपनी युवा सोच, तकनीकी समझ और नवाचार की क्षमता का उपयोग विद्यालयों में वास्तविक परिवर्तन लाने के लिए करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता यह हो कि आपके जिले में ‘कोई भी बच्चा पीछे न रहे’। प्रत्येक अधिकारी अपने जिले के परीक्षा परिणाम को 90 प्रतिशत से अधिक रखने का लक्ष्य निर्धारित करे और उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी के साथ कार्य करे। साथ ही ऐसे विद्यार्थी तैयार करें जो पढ़े, समझे, सवाल पूछे, समस्या का समाधान करें और अपने ज्ञान का जीवन में उपयोग कर सके। शिक्षा अधिकारी छात्रों में सीखने के स्तर में सुधार, विद्यालयीन गुणवत्ता, नियमित उपस्थिति, कमजोर विद्यार्थियों पर विशेष ध्यान और शिक्षण प्रक्रिया में नवाचार को उत्कृष्ट प्रदर्शन की आधारशिला बनाएं। उन्होंने तय लक्ष्यों की नियमित समीक्षा और आवश्यक रणनीति विकसित करने की भी बात कही। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार भी प्रदेश में शिक्षा के आधारभूत ढांचे को बेहतर बनाने का प्रयास कर रही है। प्रदेश में जिन विद्यालयों के पास पक्के भवन की सुविधा नहीं है, उन्हें पक्के भवन बनाकर दिए जाएंगे। विद्यालयों को बसों की सुविधा से भी जोड़ा जाएगा।

अपने परिवेश में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि युवा अधिकारियों को अपने जिले में सकारात्मक बदलाव लाने और नवाचार करने का संकल्प करना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे छात्रों को परिवार के सदस्य की तरह मानते हुए आत्मीयता से व्यवहार करें। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की भूमिका शिक्षा देने के अलावा समाज में व्यापक बदलाव लाने की भी है। ऐसे में आप विद्यार्थियों के परिवारों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देकर उनकी तरक्की का रास्ता खोलें। डॉ यादव ने कहा कि जब बच्चे स्कूल छोड़ते हैं उसके पीछे कई पारिवारिक कारण होते हैं। वे अपनी जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी शिक्षा जारी कर सकते हैं। ऐसे में शिक्षकों का दायित्व बनता है कि वे ऐसे बच्चों को ओपन स्कूल जैसे अन्य विकल्पों की भी जानकारी दें। शिक्षक विद्यार्थियों को करियर ऑप्शन्स के बारे में बताएं, उनकी काउंसलिंग करें, खास तौर पर बेटियों को मेडिकल में संभावनाओं के बारे में बताएं। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि युवा शिक्षा अधिकारी और शिक्षक अपने क्षेत्र में किए जाने वाले नवाचारों को सोशल मीडिया के माध्यम से अन्य लोगों को भी बताएं।

शिक्षा विभाग में युवा नेतृत्व की नई शुरुआत
शिक्षा विभाग में बड़े पैमाने पर युवा शिक्षा अधिकारियों को सीधे मैदानी नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी है। प्रदेश में लगभग 40 नए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ), 23 जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) और लगभग 60 विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) पदस्थ किए गए हैं। इन युवा अधिकारियों की औसत आयु लगभग 28 वर्ष है। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि यह युवा शक्ति केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में नई ऊर्जा, नई सोच और नए प्रयोगों को आगे बढ़ाने के लिए मैदानी स्तर पर उतरी है। अधिकारियों को निर्देशों के पालन तक सीमित न रहते हुए परिणामोन्मुखी नेतृत्व करने और स्थानीय समस्याओं के स्थानीय समाधान विकसित करने की दिशा में कार्य करना चाहिए। उन्होंने युवा अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे केवल योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी तक सीमित न रहें, बल्कि मैदानी अनुभवों के आधार पर नए प्रयोग करें और सफल नवाचारों को व्यापक स्तर पर लागू करने का प्रयास करें।