मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर विरोध तेज हो गया है। रविवार को प्रदेश के अलग-अलग संभागों से शिक्षक भोपाल पहुंचे और लिंक रोड नंबर-2 स्थित अंबेडकर पार्क में धरना दिया। शिक्षक संघर्ष समिति एवं वरिष्ठता बहाली मंच के बैनर तले हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल हुए।
वर्षों की सेवा के बाद परीक्षा पर सवाल
प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने कहा कि उन्होंने D.Ed और B.Ed जैसी निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के आधार पर वर्षों पहले नियुक्ति हासिल की है। ऐसे में 20 से 28 साल की सेवा के बाद दोबारा शिक्षक पात्रता परीक्षा कराना उचित नहीं है। शिक्षकों ने इसे अपने साथ अन्याय बताते हुए परीक्षा का बहिष्कार करने का ऐलान किया।
28 साल की सेवा, पोर्टल पर सिर्फ 8 साल
अध्यापक संघर्ष समिति के पदाधिकारी भारत भार्गव ने कहा कि कई शिक्षक दशकों से सरकारी सेवा कर रहे हैं। उनका दावा है कि उनकी नियुक्ति 1998 में हुई थी और करीब 28 साल की सेवा के बावजूद सरकारी पोर्टल पर उनकी सेवा अवधि केवल 8 साल दिखाई जा रही है। शिक्षकों ने वरिष्ठता बहाल करने की मांग की है।
वेतनमान को लेकर भी नाराजगी
शिक्षकों ने कहा कि उन्हें 10 साल का छठा और ढाई साल का सातवां वेतनमान नहीं मिला है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कई शिक्षकों की वर्षों की सेवा को शून्य कर दिया गया। उन्होंने सेवा अवधि, वरिष्ठता और वेतनमान से जुड़े मामलों का तत्काल समाधान करने की मांग की।
पुरानी पेंशन लागू करने की मांग
धरने में पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग भी प्रमुख रही। शिक्षकों ने सवाल उठाया कि जब सांसद और विधायक पेंशन, वेतन और भत्तों का लाभ लेते हैं, तो लंबे समय तक सरकारी सेवा देने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को पुरानी पेंशन से वंचित क्यों रखा जा रहा है।
डेढ़ लाख शिक्षक परीक्षा के दायरे में
स्कूल शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के करीब डेढ़ लाख शिक्षक TET के दायरे में बताए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने परीक्षा की प्रक्रिया शुरू की है और माध्यमिक शिक्षा मंडल को परीक्षा एजेंसी बनाया गया है।
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी स्थिति में शिक्षक पात्रता परीक्षा नहीं देंगे। प्रदर्शनकारियों ने पुरानी पेंशन, वरिष्ठता बहाली और सेवा संबंधी मांगों को लेकर आंदोलन आगे भी जारी रखने की चेतावनी दी है।