पितृपक्ष की परंपराएं

शाम को घर में न लगाएं झाड़ू, पितृपक्ष में महिलाएं ध्यान रखें ये 6 बातें

पितृपक्ष के दौरान विभिन्न धार्मिक परंपराओं का पालन किया जाता है, जैसे दीपक जलाना, श्राद्ध का भोजन न बनाना, और घर में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखना।

By : सोनिया रायकवार
शाम को घर में न लगाएं झाड़ू, पितृपक्ष में महिलाएं ध्यान रखें ये 6 बातें

पितृपक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। इस दौरान लोग अपने पितरों को याद कर उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान घर के माहौल को शांत और सकारात्मक रखने पर विशेष जोर दिया जाता है।

इस अवधि में महिलाओं को लेकर भी कई तरह की धार्मिक मान्यताएं बताई गई हैं। इनमें घर की साफ-सफाई से लेकर भोजन और परिवार के माहौल तक कई बातें शामिल हैं। हालांकि, ये बातें धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं। आइए जानते हैं पितृपक्ष के दौरान महिलाओं से जुड़ी बताई जाने वाली 6 प्रमुख बातें।

दक्षिण दिशा में जलाएं दीपक

धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान हर शाम घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। अगर आप फ्लैट में रहते हैं तो बालकनी में दक्षिण दिशा की ओर दीपक रखने की परंपरा बताई जाती है।

मान्यता है कि दक्षिण दिशा पितरों से जुड़ी मानी जाती है और इस दिशा में दीपक जलाकर पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है।

मासिक धर्म के दौरान श्राद्ध का भोजन न बनाने की मान्यता

कुछ धार्मिक परंपराओं में माना जाता है कि मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को श्राद्ध और तर्पण के लिए भोजन तैयार नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में परिवार की कोई दूसरी महिला या पुरुष सदस्य भोजन तैयार कर सकता है।

हालांकि, अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में इसको लेकर अलग मान्यताएं हो सकती हैं।

शाम के समय झाड़ू लगाने से बचें

पितृपक्ष के दौरान शाम के समय घर में झाड़ू लगाने या बड़ी सफाई करने से बचने की धार्मिक मान्यता है। श्राद्ध से जुड़े कर्मों में शुद्धता और पवित्रता का विशेष महत्व माना जाता है।

इसी वजह से कई घरों में सफाई का काम दिन के समय ही पूरा करने की परंपरा है।

भोजन का एक हिस्सा गाय को खिलाएं

पितृपक्ष में भोजन तैयार करते समय उसका एक हिस्सा अलग निकालकर गाय को खिलाने की परंपरा भी बताई जाती है। इसे पितरों के नाम से अर्पित करने की मान्यता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितृपक्ष की तिथियों पर इस तरह भोजन अर्पित करने से पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त होती है।

श्राद्ध तिथि पर पितृ का पसंदीदा भोजन बनाएं

जिस दिन परिवार में किसी पितृ की श्राद्ध तिथि हो, उस दिन उनकी पसंद का भोजन बनाने की परंपरा बताई जाती है। मान्यता के अनुसार, पितरों को प्रिय भोजन बनाकर परिवार के सदस्य उसे श्रद्धा के साथ ग्रहण करते हैं।

इसका उद्देश्य पूर्वजों को याद करना और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करना माना जाता है।

घर में वाद-विवाद से बचें

पितृपक्ष के दौरान घर में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने पर भी जोर दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, परिवार के सदस्यों को बेवजह के विवाद और तनाव से बचना चाहिए।

महिलाओं से भी परिवार के सदस्यों के साथ सामंजस्य बनाए रखने और घर में सकारात्मक माहौल रखने की बात कही जाती है।

ध्यान रखें कि पितृपक्ष से जुड़े ये नियम अलग-अलग धार्मिक परंपराओं और परिवारों में अलग हो सकते हैं। इन्हें धार्मिक मान्यताओं के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।

संबंधित सामग्री

पितृ पक्ष में बिना प्याज-लहसुन के बनाएं ये स्वादिष्ट सब्जियां, खाने वाले करेंगे तारीफ

पितृ पक्ष में बिना प्याज-लहसुन के बनाएं ये स्वादिष्ट सब्जियां, खाने वाले करेंगे तारीफ

पितृ पक्ष के दौरान, कई भारतीय परिवार प्याज और लहसुन के बिना सात्विक भोजन बनाते हैं। यहां कुछ स्वादिष्ट और आसान रेसिपीज हैं।

एक बेलपत्र, थोड़ा लाल चंदन और मन की बात… पितृ पक्ष में क्यों किया जाता है ये उपाय?

एक बेलपत्र, थोड़ा लाल चंदन और मन की बात… पितृ पक्ष में क्यों किया जाता है ये उपाय?

श्राद्ध पक्ष के दौरान बेलपत्र और लाल चंदन से शिव पूजा की विधि बताई गई है, जिससे पारिवारिक सुख-शांति और परेशानियों से राहत की कामना की जाती है।

वर्षों पुरानी इच्छा भी होगी पूरी? श्राद्धपक्ष में नंदीकेश्वर शिव का नाम लेकर करें यह उपाय

वर्षों पुरानी इच्छा भी होगी पूरी? श्राद्धपक्ष में नंदीकेश्वर शिव का नाम लेकर करें यह उपाय

श्राद्धपक्ष के दौरान नंदीकेश्वर शिव की पूजा करने की परंपरा है, जिससे व्यक्ति की मनोकामना पूरी होने की मान्यता है।

श्राद्ध का भोजन बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान, राई के तड़के को लेकर क्या है मान्यता

श्राद्ध का भोजन बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान, राई के तड़के को लेकर क्या है मान्यता

पितृपक्ष के दौरान, श्राद्ध के भोजन में राई का प्रयोग नहीं किया जाता, क्योंकि मान्यता है कि यह कौवों द्वारा अस्वीकार कर दिया जाता है।

16 श्राद्ध में किसी एक दिन गाय को खिलाएं यह आहार, धार्मिक मान्यता में पितरों का मिलता है आशीर्वाद

16 श्राद्ध में किसी एक दिन गाय को खिलाएं यह आहार, धार्मिक मान्यता में पितरों का मिलता है आशीर्वाद

श्राद्ध पक्ष में पितरों की आत्मिक शांति और परिवार के सुख-समृद्धि के लिए गाय को भोजन कराने की परंपरा है।

Advertisement

सेवा के 25 वर्ष 14 सितम्बर से  13 ऑक्टोबर