‘वंदे मातरम’ को लेकर जारी बहस अब झारखंड तक पहुंच गई है। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर मांग की है कि राज्य में सरकारी कार्यक्रमों और विद्यालयों में राष्ट्रगीत के केवल शुरुआती दो छंदों को ही अनिवार्य किया जाए। अपने पत्र में यादव ने कर्नाटक और केरल सरकारों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सरकारी आयोजनों और शिक्षण संस्थानों में ‘वंदे मातरम’ के पहले दो छंदों को ही अनिवार्य किया गया है।
प्रदीप यादव ने अपने पत्र में केंद्र सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राजनीतिक स्वार्थों के चलते देश की बहुधार्मिक भावनाओं के अनुरूप काम नहीं कर रही है। हालांकि, ये राजनीतिक आरोप कांग्रेस नेता के हैं।
केवल दो छंदों को अनिवार्य करने की मांग
कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि झारखंड में ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो छंदों को ही सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में अनिवार्य किया जाए। उनका तर्क है कि इन दो छंदों में भारत की प्राकृतिक सुंदरता और मातृभूमि की प्रशंसा का वर्णन है।
यादव के मुताबिक, शुरुआती दो छंदों में किसी खास धार्मिक प्रतीक या आस्था का उल्लेख नहीं है। उनके अनुसार, ये छंद देश की भौगोलिक और प्राकृतिक विविधता को सामने रखते हैं और इन्हें विभिन्न धर्मों से जुड़े लोग बिना किसी संकोच के एक साथ गा सकते हैं।
कर्नाटक और केरल का दिया उदाहरण
प्रदीप यादव ने अपने पत्र में कर्नाटक और केरल की सरकारों द्वारा अपनाई गई व्यवस्था का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों में सरकारी कार्यक्रमों और विद्यालयों में ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो छंदों को अनिवार्य किए जाने का उदाहरण सामने है।

उनकी मांग ऐसे समय आई है, जब ‘वंदे मातरम’ के सभी छंदों को लेकर देशभर में राजनीतिक और सार्वजनिक बहस चल रही है। यादव ने मुख्यमंत्री से झारखंड में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने पर विचार करने का अनुरोध किया है।
1937 की समिति और 1950 का संदर्भ
अपने पत्र में कांग्रेस नेता ने ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक संदर्भ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1937 में रवींद्रनाथ टैगोर और महात्मा गांधी की सलाह के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस, पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल की समिति ने इसके संबंध में निर्णय लिया था।
यादव ने आगे पत्र में उल्लेख किया कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ‘वंदे मातरम’ को आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय गीत घोषित किया था।
झारखंड में बढ़ सकती है राजनीतिक बहस
प्रदीप यादव की इस मांग के बाद ‘वंदे मातरम’ को लेकर चल रही राष्ट्रीय बहस का असर झारखंड की राजनीति में भी दिखाई देने लगा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस मांग पर क्या रुख अपनाते हैं और राज्य सरकार इस संबंध में कोई निर्णय लेती है या नहीं।