पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने सागर जिले में अवैध और जहरीली शराब से हुई मौतों को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उज्जैन में भगवान महाकाल के दर्शन करने पहुंचीं उमा भारती ने कहा कि सांसद, विधायक और दूसरे जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र के लोगों के प्रति जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने धर्म और कर्तव्य का पूरी ईमानदारी से पालन करना चाहिए। इसी दौरान उन्होंने सागर में हुए शराब कांड का जिक्र करते हुए स्थानीय नेताओं की जवाबदेही पर सवाल उठाया।
उमा भारती ने पूछे जनप्रतिनिधियों से सवाल
उमा भारती ने कहा कि अगर किसी इलाके में लंबे समय से अवैध शराब बिक रही थी, तो वहां के सांसद, विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, सरपंच और पार्षद क्या कर रहे थे? उन्होंने सवाल किया कि क्या इन जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र में चल रहे अवैध शराब के कारोबार की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों को अपने इलाके की समस्याओं और गतिविधियों की जानकारी रखनी चाहिए।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की तारीफ
शराबबंदी के मुद्दे पर उमा भारती ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री इस दिशा में अच्छा काम कर रहे हैं। उमा भारती लंबे समय से मध्य प्रदेश में शराबबंदी की पैरवी करती रही हैं। ऐसे में सागर की घटना को लेकर उनका बयान एक बार फिर चर्चा में है।
प्रदर्शनकारियों पर टिप्पणी से दुखी
जेन-जी के प्रदर्शन को लेकर पूछे गए सवाल पर उमा भारती ने प्रधानमंत्री को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने गालियां देने वालों को भी माफ कर दिया। उन्होंने बिना नाम लिए एक कवि की टिप्पणी पर नाराजगी जताई। उमा भारती के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों को कॉकरोच बताकर उनके खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने कहा कि ऐसी अमानवीय टिप्पणी से उन्हें काफी दुख हुआ और वह उस व्यक्ति का नाम तक नहीं लेना चाहतीं।
महाकाल मंदिर की घटना पर भी बोलीं
उमा भारती ने 17 अगस्त को नागपंचमी के दौरान महाकाल मंदिर में हुई अफरातफरी का भी जिक्र किया। उस दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट गई थी। उन्होंने घटना को दुखद बताते हुए कहा कि इससे सीख लेने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने श्रद्धालुओं से भी अपील की कि कुछ देवी-देवताओं की पूजा घर पर रहकर भी की जा सकती है। इससे मंदिरों में अनावश्यक भीड़ को कम करने में मदद मिल सकती है।