गणेश चतुर्थी पर दूर्वा का महत्व

श्री गणेश को क्यों चढ़ाते हैं दूर्वा, जानिए क्या है कारण, नियम और मंत्र

गणेश चतुर्थी पर दूर्वा चढ़ाने की परंपरा का महत्वपूर्ण कारण और इसके औषधीय गुणों की जानकारी।

By : सोनिया रायकवार
श्री गणेश को क्यों चढ़ाते हैं दूर्वा, जानिए क्या है कारण, नियम और मंत्र

 

गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश जी की पूजा होती है। गणेशजी की पूजा में मोदक, जनेऊ के साथ ही दूर्वा विशेष रूप से अर्पित की जाती है। आओ जानते हैं कि गणपतिजी को क्यों चढ़ाते हैं दूर्वा। दूर्वा अर्पित करने के नियम और मंत्र।


 
क्यों चढ़ाते हैं दूर्वा : 

अन्य पौराणिक कथा के अनुसार अनलासुर नाम के राक्षस ने बहुत उत्पात मचा रखा था। अनलासुर ऋषियों और आम लोगों को जिंदा निगल जाता था। दैत्य से परेशान होकर देवी-देवता और ऋषि-मुनि महादेव से प्रार्थना करने पहुंचे। शिवजी ने कहा कि अनलासुर को सिर्फ गणेशजी ही मार सकते हैं। सभी देवताओं ने गणेशजी की आराधना की। देवताओं की आराधना से प्रसन्न होकर गणेशजी उस राक्षस से युद्ध करते हुए उसे निगल गए थे और तब दैत्य के मुंह से तीव्र अग्नि निकली जिससे गणेश के पेट में बहुत जलन होने लगी। इस जल को शांत करने के लिए कश्यप ऋषि ने उन्हें दूर्वा की 21 गांठें बनाकर खाने के लिए दी। दूर्वा को खाते ही गणेश जी के पेट की जलन शांत हो गई और गणेशजी प्रसन्न हुए। कहा जाता है तभी से भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा प्रारंभ हुई। हालांकि इस संबंध में और भी कथाएं प्रचलित हैं। 
 
दूर्वा चढ़ाने का नियम : 

प्रात:काल उठकर गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर के सामने बैठकर व्रत और पूजा का संकल्प लें। फिर ऊं गं गणपतयै नम: मंत्र बोलते हुए जितनी पूजा सामग्री उपलब्ध हो उनसे भगवान श्रीगणेश की पूजा करें। गणेशजी की मूर्ति पर सिंदूर लगाएं। फिर उन्हें 21 गुड़ की ढेली के साथ 21 दूर्वा चढ़ाएं। मतलब 21 बार 21 दूर्वा की गाठें अर्पित करना चाहिए। इसके अलावा गणेशजी को मोदक और मोदीचूर के 21 लड्डू भी अर्पित करें। इसके बाद आरती करें और फिर प्रसाद बांट दें।
 
दूर्वा अर्पित करने का मंत्र : 

'श्री गणेशाय नमः दूर्वांकुरान् समर्पयामि।' इस मंत्र के साथ श्रीगणेशजी को दूर्वा चढ़ाने से जीवन की सभी विघ्न समाप्त हो जाते हैं और श्रीगणेशजी प्रसन्न होकर सुख एवं समृद्धि प्रदान करते हैं।
 
क्या होगा दूर्वा अर्पित करने से :

इस दिन गणेशजी को दूर्वा चढ़ाकर विशेष पूजा की जाती है। ऐसा करने से परिवार में समृद्धि बढ़ती है और मनोकामना भी पूरी होती है। इस व्रत का जिक्र स्कंद, शिव और गणेश पुराण में किया गया है। 


दूर्वा की उत्पत्ति : 

दूर्वा एक प्रकार की घास है जिसे प्रचलित भाषा में दूब भी कहा जाता है, संस्कृत में इसे दूर्वा, अमृता, अनंता, गौरी, महौषधि, शतपर्वा, भार्गवी आदि नामों से जाना जाता है। दूर्वा कई महत्वपूर्ण औषधीय गुणों से युक्त है। इसका वैज्ञानिक नाम साइनोडान डेक्टीलान है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय जब समुद्र से अमृत-कलश निकला तो देवताओं से इसे पाने के लिए दैत्यों ने खूब छीना-झपटी की जिससे अमृत की कुछ बूंदे पृथ्वी पर भी गिर गईं थी जिससे ही इस विशेष घास दूर्वा की उत्पत्ति हुई।

 

संबंधित सामग्री

गणपति बप्पा को लगाएं खास भोग, घर पर ऐसे बनाएं स्वादिष्ट मोदक वाली खीर

गणपति बप्पा को लगाएं खास भोग, घर पर ऐसे बनाएं स्वादिष्ट मोदक वाली खीर

गणेश चतुर्थी के पवित्र मौके पर, भक्तों ने भगवान गणेश को मोदक वाली खीर अर्पित की, जो एक स्वादिष्ट और अनूठी डिश है।

झारखंड में गणेश चतुर्थी की धूम: राज्यपाल संतोष गंगवार और CM हेमंत सोरेन ने दी शुभकामनाएं

झारखंड में गणेश चतुर्थी की धूम: राज्यपाल संतोष गंगवार और CM हेमंत सोरेन ने दी शुभकामनाएं

झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गणेश चतुर्थी पर शुभकामनाएं दीं, राज्य में उत्सव की धूम।

बॉलीवुड में गणेशोत्सव की धूम, सुनीता आहूजा ने अकेले किया बप्पा का स्वागत; अंबानी से खान परिवार तक दिखी भक्ति

बॉलीवुड में गणेशोत्सव की धूम, सुनीता आहूजा ने अकेले किया बप्पा का स्वागत; अंबानी से खान परिवार तक दिखी भक्ति

गणेश चतुर्थी पर मुंबई में बॉलीवुड सितारों ने गणपति बप्पा का भव्य स्वागत किया। सितारों के घरों में उत्साह और श्रद्धा के साथ गणपति पूजा की गई।

बप्पा की भक्ति में डूबा देश, लालबाग के राजा से 72 फीट के गणेश तक...

बप्पा की भक्ति में डूबा देश, लालबाग के राजा से 72 फीट के गणेश तक...

गणेश चतुर्थी के साथ भारत में गणेशोत्सव शुरू हो गया है, जिसमें लालबाग के राजा, इंदौर के 14 फीट बप्पा, और हैदराबाद के 72 फीट गणपति प्रमुख आकर्षण हैं।

Ganesh Chaturthi 2026: बप्पा की प्रतिमा को घर में कितने दिन रखें? डेढ़ से 10 दिन तक की परंपरा

Ganesh Chaturthi 2026: बप्पा की प्रतिमा को घर में कितने दिन रखें? डेढ़ से 10 दिन तक की परंपरा

14 सितंबर 2026 से गणेश चतुर्थी का पर्व शुरू होगा, जिसमें विभिन्न अवधि के लिए गणपति की स्थापना और विसर्जन की परंपराएँ शामिल हैं।

Advertisement

मुख्य मंत्री सुगम परिवहन सेवा MP Add  on 09 Sep 2026 To 26 Sep 2026

Advertisement

सेवा के 25 वर्ष 14 सितम्बर से  13 ऑक्टोबर