सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद छत्तीसगढ़ में सेवारत शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य हो गया है। तय समय तक परीक्षा पास नहीं करने वालों की पदोन्नति और सेवा पर असर पड़ सकता है। मध्य प्रदेश में भी TET परीक्षा की तैयारियां तेज हैं।सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद छत्तीसगढ़ सरकार को नियमित रूप से TET आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही कार्यरत शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक TET उत्तीर्ण करने का समय दिया गया है। यदि इस अवधि तक शिक्षक पात्रता परीक्षा पास नहीं की जाती है, तो इसका असर नौकरी की निरंतरता और पदोन्नति दोनों पर पड़ सकता है।
इधर, मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) ने भी सेवारत शिक्षकों की TET परीक्षा को सितंबर-अक्टूबर 2026 में कराने की तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में दोनों राज्यों के लाखों शिक्षकों की नजर अब इस परीक्षा पर टिकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
29 मई 2026 को पारित आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्यों और संबंधित परीक्षा प्राधिकरणों को TET नियमित रूप से आयोजित करनी होगी। अदालत ने कहा कि सामान्य तौर पर साल में दो बार, लगभग छह महीने के अंतराल पर परीक्षा कराई जाए, ताकि पात्र शिक्षक समय रहते आवश्यक योग्यता हासिल कर सकें।कोर्ट के निर्देश के मुताबिक छत्तीसगढ़ में कार्यरत प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक TET पास करने का अवसर दिया गया है।
TET पास नहीं करने पर क्या होगा असर?
शिक्षक संगठनों के अनुसार, निर्धारित समय-सीमा के भीतर TET पास नहीं करने वाले शिक्षकों की पदोन्नति प्रभावित हो सकती है। वहीं, समय-सीमा समाप्त होने के बाद उनकी सेवा को लेकर भी कानूनी जटिलताएं खड़ी हो सकती हैं।छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन शिक्षकों के पास TET की अनिवार्य योग्यता नहीं होगी, उन्हें प्रमोशन के लिए पात्र नहीं माना जाएगा।
NCTE नियमों से जुड़ा है पूरा मामला
शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) का आयोजन राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के दिशा-निर्देशों के तहत किया जाता है। राष्ट्रीय स्तर पर CTET का आयोजन होता है, जबकि राज्यों में अलग-अलग एजेंसियां TET कराती हैं। छत्तीसगढ़ में CG Vyapam और मध्य प्रदेश में ESB इस परीक्षा का आयोजन करते हैं।शिक्षक संगठनों का तर्क है कि वर्ष 2010 से पहले नियुक्त कई शिक्षकों की भर्ती के समय TET अनिवार्य नहीं थी। इसलिए पुराने शिक्षकों को इस शर्त से छूट मिलनी चाहिए।
मध्य प्रदेश में भी TET की तैयारी तेज
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ESB) ने सेवारत शिक्षकों के लिए प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 का संशोधित कार्यक्रम जारी किया है। प्रस्तावित शेड्यूल के अनुसार परीक्षा सितंबर-अक्टूबर 2026 में आयोजित की जा सकती है। इससे प्रदेश के एक लाख से अधिक शिक्षकों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
करीब दो लाख शिक्षक होंगे प्रभावित
शिक्षक संगठनों का दावा है कि TET की अनिवार्यता से छत्तीसगढ़ के लगभग 80 हजार और मध्य प्रदेश के एक लाख से अधिक सेवारत शिक्षक प्रभावित होंगे। दोनों राज्यों के संगठन इस मुद्दे पर कानूनी और संगठनात्मक स्तर पर प्रयास कर रहे हैं।
शिक्षक संगठनों ने जताई नाराजगी
शिक्षक संगठनों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से राहत मिलनी चाहिए। उनका आरोप है कि इस मुद्दे पर सरकार की ओर से अपेक्षित पहल नहीं हुई है। इसे लेकर शिक्षकों के बीच असंतोष बढ़ रहा है और संगठन आगे की रणनीति पर विचार कर रहे हैं।
अब आगे क्या?
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि छत्तीसगढ़ में पात्र शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक TET पास करनी होगी। वहीं मध्य प्रदेश में परीक्षा की तारीखों का इंतजार है। ऐसे में दोनों राज्यों के लाखों शिक्षकों के लिए आने वाले महीनों में TET सबसे अहम परीक्षा बनने जा रही है।