कूनो में दिखी दुर्लभ कैराकल बिल्ली, वन्यजीव संरक्षण में मोहन सरकार की बड़ी उपलब्धि

रेयर कैराकल कैट स्पॉटेड इन कूनो

कूनो में दिखी दुर्लभ कैराकल बिल्ली, वन्यजीव संरक्षण में मोहन सरकार की बड़ी उपलब्धि

मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में कैराकल बिल्ली की उपस्थिति दर्ज की गई, जो वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों की एक बड़ी सफलता है।

कूनो में दिखी दुर्लभ कैराकल बिल्ली वन्यजीव संरक्षण में मोहन सरकार की बड़ी उपलब्धि

मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक और उत्साहजनक खबर सामने आई है। चीतों के पुनर्वास के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुके कूनो में अब दुर्लभ जंगली बिल्ली प्रजाति कैराकल की मौजूदगी दर्ज की गई है। कैमरा ट्रैप सर्वे के दौरान कैराकल की तस्वीर कैद हुई है, जिसे विशेषज्ञ कूनो के बेहतर होते पारिस्थितिकी तंत्र और समृद्ध जैव विविधता का संकेत मान रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस उपलब्धि को प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता बताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कैराकल की तस्वीर साझा की है।

दशकों बाद कूनो में दर्ज हुई मौजूदगी

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस क्षेत्र में कई दशकों बाद कैराकल की उपस्थिति दर्ज की गई है। भारत में यह प्रजाति अत्यंत दुर्लभ मानी जाती है और इसकी संख्या 50 से भी कम बताई जाती है। वर्तमान में इसके प्रमुख आवास राजस्थान और गुजरात के कुछ सीमित क्षेत्र ही माने जाते हैं।विशेषज्ञों के मुताबिक 1990 से 2020 के बीच कैराकल की आबादी में 95 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। ऐसे में कूनो में इसकी मौजूदगी संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

कूनो बन सकता है नया आश्रय स्थल

कूनो राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन अभी यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि कैमरे में कैद हुआ कैराकल स्थायी रूप से इसी क्षेत्र में रहता है या फिर राजस्थान अथवा गुजरात से यहां पहुंचा है।हालांकि वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूनो का वातावरण और खाद्य श्रृंखला इस प्रजाति के अनुकूल साबित होती है तो मध्यप्रदेश भविष्य में कैराकल का नया स्थायी आवास बन सकता है। यह राज्य की जैव विविधता के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।

क्या है कैराकल की खासियत?

कैराकल एक रहस्यमयी और मुख्य रूप से रात्रिचर जंगली बिल्ली है। इसकी सबसे बड़ी पहचान इसके लंबे नुकीले कान और उनके सिरों पर मौजूद काले रंग के गुच्छेदार बाल हैं।इस प्रजाति की फुर्ती और शिकार क्षमता बेहद प्रभावशाली मानी जाती है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार कैराकल हवा में ऊंची छलांग लगाकर उड़ते पक्षियों को भी पकड़ सकती है। ऐतिहासिक रूप से इसे शाही शिकार अभियानों में इस्तेमाल किए जाने के उल्लेख भी मिलते हैं।

चीतों के बाद कूनो की बढ़ी अहमियत

अफ्रीका से लाए गए चीतों के सफल पुनर्वास के बाद कूनो राष्ट्रीय उद्यान पहले ही वैश्विक स्तर पर चर्चा में है। अब कैराकल जैसी अत्यंत दुर्लभ प्रजाति की मौजूदगी ने यह संकेत दिया है कि यहां का पारिस्थितिकी तंत्र लगातार मजबूत हो रहा है।वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि शीर्ष शिकारी और दुर्लभ प्रजातियों की मौजूदगी किसी भी जंगल के स्वस्थ और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत होती है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जताई खुशी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक्स पर तस्वीर साझा करते हुए कहा कि कूनो में कैराकल की उपस्थिति प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन की दिशा में सकारात्मक परिणामों को दर्शाती है। उन्होंने इसे मध्यप्रदेश की जैव विविधता संरक्षण यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

 

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